अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को आदमखोर के भय निजात दिलाने वाले शिकारियों को वन विभाग बंदूक की गोली तक का खर्चा नहीं देता है। आज जिम कार्बेट माने जाने वाले ये शिकारी अपने खर्च से काम करते हैं।
वन विभाग गुलदार को आदमखोर घोषित कर शिकारी को क्षेत्र में तो भेजते हैं, लेकिन आने जाने का खर्चा तक नहीं दिया जाता है।
यहां तक कि शिकारी को गुलदार को मारने के लिए बंदूक की गोली तक खुद खरीदनी पड़ती है। ऐसे में इस कार्य के लिए आधुनिक तकनीकी की बंदूक की सुविधा मुहैया कराना दूर की बात है।
चर्चित शिकारी पौड़ी के लोअर चोपड़ा निवासी जॉय हुकिल कहते हैं कि आधुनिक सुविधा मुहैया हो जाए तो यह कार्य काफी आसान हो जाएगा।