उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क की मोतीचूर वन रेंज के अंतर्गत डांडा पूर्वी बीट में गश्त के दौरान पार्क कर्मियों की शिकार के इरादे से जंगल में घुसे शातिर शिकारियों से मुठभेड़ हो गई।
जवाबी हमले में छर्रे लगने से एक शिकारी घायल हो गया। पार्क कर्मियों ने मौके से घायल और उसके एक अन्य साथी को दबोच लिया, जबकि चार भागने में कामयाब रहे।
कर्मचारियों ने वन क्षेत्र में घंटों कांबिंग की, लेकिन फरार शिकारियों का कोई सुराग नहीं मिला। घटनास्थल से एक मृत गोह (मॉनिटर लिजर्ड) बरामद किया है, जो दुर्लभ प्रजाति का बताया जा रहा है।
चार शिकारी कुत्ते छोड़ दिए
सोमवार सुबह मोतीचूर वनरेंज के सेक्सन अधिकारी गोविंद सिंह खाती के नेतृत्व में पार्क प्रशासन की टीम सुरक्षा के दृष्टिगत जंगल में गश्त कर रही थी।
करीब पांच, छह किमी अंदर पहुंचने के बाद उन्हें जंगल में कुछ आहट सुनाई दी। टीम आगे बढ़ी तो जंगल के अंदर छह सात शिकारियों को देख दंग रह गई।
टीम जब तक धरपकड़ की कार्रवाई करती, शिकारियों ने उनके ऊपर चार शिकारी कुत्ते छोड़ दिए। पार्क कर्मियों ने बचाव में फायर झोंक दिए।
गोली लगने से कुत्ते वहीं ढेर हो गए। तभी शिकारी तमंचे से फायर झोंकते हुए भागने लगे। पार्क कर्मियों ने जवाबी हमला किया। जिससे छर्रे लगने से एक शिकारी घायल हो गया। टीम ने घायल शिकारी और उसके साथी को पकड़ लिया, जबकि चार अन्य फरार हो गए।
शिकारियों की पहचान
पार्क प्रशासन ने मुठभेड़ में घायल शिकारी अजीवानाथ पुत्र बूटीराम जबकि हत्थे चढ़े साथी की पहचान बंटू पुत्र पिंटूनाथ निवासी सपेरा बस्ती, हरिपुरकलां के रूप में बताई है। सेक्सन अधिकारी जीएस खाती ने बताया कि मौके से फरार डमरू पुत्र काला, राकीनाथ, अशोक पुत्र रसीला निवासी सपेरा बस्ती, हरिपुरकलां हैं।
घायल शिकारी अस्पताल में भर्ती
शिकारी अजीवानाथ की पीठ पर गोली के छर्रे लगे हैं। उसे पार्क कर्मी चादर और डंडों की मदद से जंगल से कंधों पर उठाकर खांडगांव की सीमा तक लाए। बाद में उसे सरकारी अस्पताल, ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। मौके पर पार्क प्रशासन के वार्डन एसपी शर्मा, पार्क कर्मी सुरेंद्र जोशी, दिनेश बिष्ट, अमीर चंद आदि मौजूद थे।
सुरक्षा में कहां चूक हुई है, यह जांच का विषय है। कितने शिकारी फरार हुए हैं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल छानबीन की जा रही है।
- एसपी सुबुद्धि, निदेशक पार्क प्रशासन
पार्क में वन्य जीवों की सुरक्षा पर उठे सवाल
प्रतिबंधित पार्क क्षेत्र में रेंज कार्यालय के समीप स्थित रास्ते से आखिरकार शिकारी सात किलोमीटर भीतर जंगल में कैसे घुसे, यह इस घटना के बाद उभरा सबसे बड़ा सवाल है।
यह हाल तब है, जब पार्क प्रशासन वन्य जीव जंतुओं की सुरक्षा चाक चौबंद होने का दावा करता है। हैरत की बात यह कि पार्क प्रशासन को शिकारी मय हथियार जंगल में कब घुसे, इसकी सही जानकारी तक नहीं है।
पार्क क्षेत्र में मानवीय घुसपैठ प्रतिबंधित है। जलावन के लकड़ी तो दूर, यहां कोई बाहरी व्यक्ति बिना अनुमति के घूम भी नहीं सकता।
दावा किया जाता है कि पार्क कर्मी घुसपैठ रोकने के लिए नियमित गश्त करते हैं। लेकिन मंगलवार को डांडा पूर्वी बीट पर शिकारियों का जंगल में घुसकर दुर्लभ जीव गोह का शिकार करना पार्क प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।