ट्रांसप्लांट का काम खानापूरी जैसा : पर्यावरणविद
पर्यावरणविद् रवि चोपड़़ा कहते हैं कि वृक्षों को ट्रांसप्लांट करना आसान काम नहीं है। इसके अलावा ट्रांसप्लांट किए गए वृक्षों को कितना ध्यान रखा जा रहा है। बदलते मौसम के चलते ट्रांसप्लांट का काम और चुनौतीपूर्ण हो गया है। पर्यावरणविद् इला चौहान कहती हैं कि जो ट्रांसप्लांट कर पेड़ों को लगाया गया है, वह ठूंठ जैसे हैं। यह बहुत दुखद है। वृक्षों का ट्रांसप्लांट का काम खानापूरी जैसा है। पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने का सीजन जैसे कई बातों का ध्यान रखना होता है।
कई साइट पर प्रत्यारोपित कर पेड़ों को लगाया गया
लोक निर्माण विभाग के ऋषिकेश खंड के अधिशासी अभियंता भृगु द्विवेदी कहते हैं कि वृक्षों का प्रत्यारोपण का काम विशेषज्ञों के निर्देशन में किया गया। अलग-अलग नौ साइटों पर 600 से अधिक प्रत्यारोपित किए गए वृक्षों को लगाया गया। इसमें स्टेडियम के सामने भी वृक्ष ट्रांसप्लांट किए गए। मौसम का प्रतिकूल होना भी एक बड़ा कारण रहा है, गर्मी भी खूब हो रही थी।
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चार हजार पौधों को लगाने की योजना
लोनिवि ने सहस्त्रधारा रोड पर चार हजार से अधिक पौधों को लगाने की योजना बनाई है। ईई द्विवेदी के अनुसार, पांच साल की कार्ययोजना बनाई है, यहां पर छायादार आदि प्रजाति के पौधों को लगाया जाएगा। यह काम वन विभाग करेगा। इन पौधों के पांच साल तक देखभाल की जिम्मेदारी भी रहेगी। इस काम में एक करोड़ साठ लाख की राशि वन विभाग को दी गई है।