15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के लिए पलटन बाजार कोतवाली के समीप दुकान में लगे तिरंगे देखती बालिका
राजधानी में तिरंगे का अपमान किया जा रहा है। स्थिति ये है कि मानकों को ताक पर रखकर प्लास्टिक व पॉलिथीन से बने तिरंगे बेचे जा रहे हैं, 15 अगस्त के बाद यही तिरंगा सड़क यह अन्य स्थानों फेंक दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो कुछ घरों में प्लास्टिक व पॉलिथीन से तिरंगा बनाया जा रहा है। संविधान में वर्णित नियमों के अनुसार में खादी व रेशमयुक्त खादी पर ही तिरंगा बनाया जा सकता है। पलटन बाजार स्थित गांधी आश्रम के संचालक वीरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि तिरंगे के सम्मान को अनदेखा कर शहर के कई स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज बनाया जा रहा है। जिनमें 24 तिल्लियों के स्थान पर किसी में 18 तो किसी में 20 बनाईं जा रही हैं। इसके अलावा अनुपात भी सहीं नहीं रखा जा रहा है।
तीन साल की सजा और जुर्माने का है प्रावधान
राष्ट्र ध्वज का अपमान करने पर तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इस संबंध में इसी साल की शुरुआत में फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 और प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 के तहत यह एडवाइजरी जारी की गई है। इस एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि महत्वपूर्ण नेशनल कल्चरल और स्पोर्ट्स इवेंट में पब्लिक फ्लैग पेपर का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इन फ्लैग को इवेंट के बाद ग्राउंड में नहीं फेंका जा सकता है। इनको डिस्पोज्ड ऑफ करने के लिए भी नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। इसके अलावा किसी पब्लिक प्लेस पर या किसी अन्य जगह पर अगर राष्ट्र ध्वज का अपमान होता है। इसके ऊपर कुछ लिखा जाता है या इसको हानि पहुंचाई जाती है, तो ऐसा करने वाले को तीन साल तक की सजा हो सकती है। जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
कोट:::
अगर कोई प्लास्टिक व पॉलिथीन से बने झंडे बेच रहा है तो यह नियमों के विरुद्ध है। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बृहस्पतिवार को टीम के साथ दुकानों पर छापा मारकर कार्रवाई की जाएगी।
- कमलेश मेहता, एसडीएम