राजधानी देहरादून में शीला की कहानी ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि की है दून में लड़कियों की खरीद फरोख्त हो रही है। राजधानी में ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो लड़कियों का प्लेसमेंट दो तरह के धंधे में कर रहा है।
परिवार को रुपयों का झांसा
जिस्म फरोशी और दूसरा घरों में कामकाज। दोनों ही धंधों में लड़कियों का जबरदस्त उत्पीड़न है। इन एजेंसी को चलाने वाले गैंग असम, बंगलादेश व वेस्ट बंगाल में गरीब परिवारों की लड़कियों को टारगेट करते हैं।
परिवार को रुपयों का झांसा दिया जाता है जबकि लड़की को सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए जाते हैं। जिनका नसीब कुछ अच्छा होता है उन्हें किसी घर में काम मिल जाता है, वरना देह व्यापार तो है ही।
लड़की भी भागने का प्रयास नहीं करती
दोनों ही धंधों में दलालों को तय कमीशन मिलता है। लड़की भाग न जाए, इसलिए उसे बताया ही नहीं जाता कि वह भारत के किस कोने में है। अनपढ़ होने और हिंदी न आने के कारण लड़की भी भागने का प्रयास नहीं करती।
लड़कियां सफेदपोशों के घरों में कैद
सूत्रों के अनुसार, दून के कई पॉश इलाकों में ऐसी मासूम लड़कियां सफेदपोशों के घरों में कैद हैं। जबकि कई सेक्स रैकेट का हिस्सा बन चुकी हैं। एसएसपी केवल खुराना, ने बताया पुलिस अब घरों में काम करने वाली दूसरे राज्यों की लड़कियां का रिकार्ड रखेगी।
अगर लड़कियां को अवैध रूप से दून भेजा जा रहा है तो इसकी जांच होगी। किसी का उत्पीड़न हो रहा है तो उसे वापस भेजने का इंतजाम भी पुलिस करेगी।