आपदा के दौरान बेघर हुए लोगों को अस्थायी आवास मुहैया कराने के अमर उजाला फाउंडेशन, हेस्को और एनसीपीडीपी-टार्न के अभियान की रविवार को नींव पड़ गई।
फाउंडेशन पहले चरण में आपदाग्रस्त तीन जिलों रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली में जरूरतमंद लोगों के लिए स्थानीय सामग्री का उपयोग कर और स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षित करके अस्थायी आवास (मिड टर्म शैल्टर) बनाएगा।
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इसके लिए अमर उजाला फाउंडेशन के उत्तराखंड आपदा राहत कोष में अमर उजाला और दानदाताओं द्वारा जमा कराए गए करीब सवा दो करोड़ की धनराशि का इस्तेमाल किया जाएगा।
अभियान के पहले चरण में शुक्लापुर स्थित हेस्को परिसर में संबंधित जिलों के राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण देने की शुरुआत कर दी गई। चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 27 राजमिस्त्री हिस्सा ले रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन
आपदा राहत के क्षेत्र में दशकों से काम करने वाली संस्था नेशनल सेंटर फॉर पीपुल्स एक्शन इन डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस (एनसीपीडीपी) के राजेंद्र देसाई और रूपल देसाई और देहरादून की उनकी सहयोगी संस्था टैक्नोलॉजी एंड रिसर्च नेटवर्क (टार्न) के रामकृष्ण मुखर्जी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं।
इस प्रशिक्षण में हेस्को के नेटवर्क के स्वैच्छिक संगठन आगाज फेडरेशन (चमोली), जाड़ी (थराली), ग्रास (रुद्रप्रयाग) हरियाली संरक्षण प्रशिक्षण एवं जन विकास संस्थान (कुलसारी-चमोली), स्वराज बहुउद्देश्यीय संस्था (रुद्रप्रयाग) के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
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प्रशिक्षण के दौरान एनसीपीडीपी-टार्न द्वारा तैयार किए गए मिड टर्म शैल्टर के मॉडल के आधार पर हेस्को परिसर में करीब दो सौ वर्ग फुट का एक आवास तैयार किया जाएगा। इसके अगल चरण में स्थानीय स्वैच्छिक संगठनों के सहयोग से पांच अन्य केंद्रों पर ऐसे ही मिड टर्म शैल्टर बनाए जाएंगे। उसके साथ ही 20 गांवों में करीब 150 अस्थायी आवास बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
इस बारे में विस्तृत जानकारी अमर उजाला फाउंडेशन की वेबसाइट फाउंडेशन डॉट अमर उजाला डॉट कॉम पर जाकर उत्तराखंड रिहैबलिटेशन पर क्लिक करें।
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