तमाम वादों में सालों लग जाते
छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद गत छह जून को राज्य उपभोक्ता आयोग ने न सिर्फ कंपनी की अपील को खारिज कर दिया, बल्कि सेवा में कोताही बरतने पर नाराजगी भी जताई। आयोग की अध्यक्ष कुमकुम रानी और मेंबर बीएस मनराल ने फैसले में कहा है कि जिला आयोग का निर्णय पूरी तरह से उचित और कानून के अनुरूप है। राज्य आयोग का भी मानना है कि बीमा कंपनी ने निश्चित रूप से सेवा में कमी की है।
उपभोक्ता मामलों के जानकर एडवोकेट योगेश शर्मा का कहना है कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत छह महीने में शिकायत के निपटारे का समय दिया गया है, लेकिन मुकदमों के बोझ व अन्य कारणों से तमाम वादों में सालों लग जाते हैं।
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एडवोकेट कोट बादल फटने पर मुआवजा वाली खबर के साथ
उपभोक्ता मामलों के जानकार अधिवक्ता योगेश शर्मा का कहना है कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत केस का निपटारा करने का अवधि 6 महीने तय की गई है, लेकिन मुकदमों का बोझ इतना है कि व्यावहारिक तौर पर उपभोक्ता आयोग के समक्ष अर्जी दाखिल करने, नोटिस होने, साक्ष्य व प्रतिउत्तर आदि कार्यवाही के चलते केस का निपटारा होने में सालों भी लग रहे हैं।