ईंटों पर खनन विभाग की ओर से लिए जाने वाले शुल्क में भारी कटौती करने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर गुरुवार को राज्य कैबिनेट की मुहर लग गई है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में भवन निर्माण की लागत कम होना तय है। वहीं विभिन्न विभागों में अंशकालिक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को संविदा पर रखने की बात तय हुई है।
इसकी कट ऑफ डेट भी वर्ष 2008 से बढ़ाकर 2011 कर दी है। यानी पांच साल की सेवा देने वाले अंशकालिक कर्मचारी भी संविदा नियुक्ति के दायरे में आ जाएंगे। इससे बड़ी तादाद में सेवारत कर्मियों को लाभ मिलेगा। संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों का बढ़ेगा मानदेय बढ़ाने जाने संबंधी प्रस्ताव भी कैबिनेट ने पास कर दिया।
देर रात तक चली कैबिनेट
सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में शाम चार बजे शुरू हुई राज्य कैबिनेट की बैठक देर रात तक चली। बैठक में यह भी तय हुआ है कि जिला योजना कमेटी की बैठक में ब्लॉक प्रमुखों को रोटेशन से मौजूद रहने की अनुमति प्रदान की जाएगी। इसके लिए विधानसभा से अध्यादेश पास कराया जाएगा।
वहीं कमेटी में पांच नामित सदस्यों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। ईंट-भट्टा संचालकों को बड़ी राहत देने संबंधी खनन विभाग का एक अहम प्रस्ताव भी पास किया गया है। इसमें खनन विभाग की ओर से प्रति हजार ईंट पर 1000 रुपये के शुल्क को घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक अन्य पड़ोसी राज्यों में यह शुल्क 50-60 रुपये है, जबकि उत्तराखंड में यह काफी अधिक था। नई व्यवस्था से ईंट की कीमतों में कमी आना तय है। इसी क्रम में आबकारी विभाग की ओर से लाए गए एक प्रस्ताव में बॉटलिंग नीति में संशोधन किया गया है, जिससे बॉटलिंग उद्यमियों को सहूलियत मिलेगी।