मसूरी, नैनीताल में आपदा की मार सीधे तो नहीं पड़ी, लेकिन होटलों में कार्यरत स्टाफ इसका सीधे शिकार हुआ है। उत्तराखंड में आपदा के बाद से इन स्थानों से पर्यटकों ने मुंह मोड़ लिया। खाली पड़े होटल देख होटल संचालकों ने अतिरिक्त स्टाफ को कम कर दिया है।
हर सीजन में आक्यूपेंसी फुल रहती थी, लिहाजा, पर्यटकों की सुविधा के लिए बड़े पैमाने पर केटरिंग, रूम सर्विस के लिए अतिरिक्त तैनाती होती थी। कुक, वेटर, अटैंडेंट के तौर पर भी बड़ी संख्या में युवा भर्ती किए जाते थे। अब यह सब सेवा से बाहर कर दिए गए हैं। इनकी संख्या कुल स्टाफ की तकरीबन 10 फीसदी होती थी। होटल व्यवसायियों ने बिगड़े हालात देखते हुए लग्जरी टैक्स और वैट में भी छूट मांगी है। अभी तक साढ़े 17 फीसदी सर्विस टैक्स के रूप में जा रहा था।
डिस्काउंट के बाद भी आक्यूपेंसी फुल नहीं
आपदा से उबरने के लिए होटलों ने 30 से 50 फीसदी तक डिस्काउंट दिया। सीजन में अतिरिक्त स्टाफ कर देते थे, उसे हटाया गया। होटलों में आक्यूपेंसी फुल नहीं हो पा रही। सरकार से गुजारिश की गई थी कि नैनीताल में आपदा नहीं है, इसे लेकर प्रचार-प्रसार किया जाए। ऐसा किया गया है। अभी और किए जाने की जरूरत है।
- कमल जगाती, नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन
आपदा से उबरने को खर्च में की गई कटौती
कई होटल ऐसे हैं, जिन्होंने स्टाफ की छुट्टी कर दी है। इसकी वजह यह कि सीजन में पर्यटक आए नहीं। इनके वेतन, सुविधाओं पर होटलों को खर्च करना पड़ रहा था। आपदा से उबरने के लिए इसमें कटौती की गई। कोलकाता में टूरिज्म कान्क्लेव में हिस्सा लिया ताकि पर्यटकों तक यह बात पहुंचाई जा सके कि मसूरी में कुछ नहीं हुआ है।
-संदीप साहनी, उत्तराखंड होटलियर्स एसोसिएशन
डेढ़ लाख से ज्यादा को झटका
उत्तराखंड में बाढ़ से आई आपदा ने डेढ़ लाख से अधिक को बेरोजगार कर दिया है। एसोचैम सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन ने एक रिपोर्ट में टूरिज्म सेक्टर के 85 फीसदी से अधिक प्रभावित होने की बात कही है। एसोचैम के सचिव डीएस रावत के मुताबिक मसूरी और नैनीताल, जो आपदा से सीधे प्रभावित नहीं हुए, यहां भी 75 फीसदी की गिरावट है। पर्यटन सीजन से लोग साल भर के लिए कमाते थे। साल भर के नुकसान का आंकलन चार हजार, 170 करोड़ से अधिक का बैठता है।
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