अस्पतालों में कर्मचारियों की लापरवाही की एक शर्मनाक नमूना उत्तराखंड के चंपावत में देखने को मिला।
इलाज से ज्यादा अव्यवस्थाओं के लिए चर्चित चंपावत जिला अस्पताल के एक वार्ड में गर्भवती को अपने पति के साथ नौ घंटे बंद रहना पड़ा। बुधवार की रात बार-बार आवाज देने के बावजूद अस्पताल का कोई कर्मचारी वार्ड का दरवाजा खोलने नहीं आया। चार बेड के इस वार्ड में न शौचालय था और न ही पीने के पानी।
दोनों ने वार्ड में पहले से रखे आधे बोतल पानी से जैसे-तैसे रात गुजारी। सुबह दरवाजा खुलने पर महिला के पति ने आपबीती सुनाई। मामले की शिकायत डीएम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से की गई है।
29 किमी दूर दियूरी के जीवन राम की पत्नी कमला देवी को पेट दर्द होने पर बुधवार शाम 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद हालत सुधरने पर उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। रात करीब 10 बजे डाक्टर ने उसका चेकअप भी किया।
जीवन राम के मुताबिक करीब 11 बजे पत्नी को दिक्कत होने पर जब वह दरवाजा खोलने लगा तो दरवाजा बाहर से बंद था। आवाज लगाने के बावजूद अस्पताल के किसी भी कर्मचारी ने दरवाजा नहीं खोला।
इस दौरान महिला ने वार्ड के भीतर ही उल्टी भी कर दी। दंपति करीब 9 घंटे वार्ड में बंद रहे। सुबह छह बजे जब वार्ड का दरवाजा खुला तो दंपति के सवाल पर नर्स ने कथित अभद्रता की। दंपति ने डीएम और अस्पताल प्रशासन ने मामले की शिकायत की है।
अनजाने में लगी कुंडी : अस्पताल प्रशासन
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वार्ड के बाहर दरवाजा अनजाने में बंद हो गया, लेकिन दरवाजे में बाहर से कुंडी किसने लगाई, यह पता नहीं। मामले की जांच की जाएगी। चिकित्साधीक्षक डा. एसबी ओली का कहना है कि वार्ड ब्वॉय और चौकीदारों की कमी से भी दिक्कत हो रही है।
मामला गंभीर है। अस्पताल की लापरवाही की जांच कराई जाएगी। इसके बाद जो कार्रवाई जरूरी होगी, वह की जाएगी।
- दीपेंद्र कुमार चौधरी, डीएम, चंपावत