उत्तराखंड में जंगल की आग भयावह होती जा रही है। जिस तेजी से घटनाएं बढ़ रही हैं, उससे 2016 और बीते वर्ष लगी भीषण आग का रिकॉर्ड टूटता दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटे में 227 घटनाओं में 561 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। जबकि अब तक कुल 1443 वनाग्नि की घटनाएं रिपोर्ट की जा चुकी हैं।
प्रदेश के गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में जंगलों में लगी आग कहर बरपा रही है। बुधवार को वनाग्नि की सबसे अधिक घटनाएं सामने आईं। प्रदेश में कुल 227 स्थानों पर जंगलों में आग लगी। एक व्यक्ति के आग में झुलसने की सूचना है। मुख्य वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटे में गढ़वाल में आरक्षित वन क्षेत्र में 43, सिविल वन पंचायत क्षेत्र में 76, कुल 119 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं।
वहीं, कुमाऊं क्षेत्र में आरक्षित वन क्षेत्र में 73, सिविल वन पंचायत क्षेत्र में 26, कुल 99 घटनाएं दर्ज की गईं। इसी तरह से संरक्षित वन्य जीव पार्कों में भी वनाग्नि की नौ घटनाएं रिपोर्ट की गईं। वनाग्नि की इन घटनाओं में कुल 561 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जबकि 11 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है।
15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन में इस वर्ष अब तक वनाग्नि की कुल 1443 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें गढ़वाल में 642, कुमाऊं में 724 और संरक्षित वन्य जीव क्षेत्र की 77 घटनाएं शामिल हैं। इनमें 2432.62 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। जबकि 60 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है। वहीं पांच लोगों के घायल होने के साथ एक व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है।