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आपबीतीः प्राकृतिक आपदा में जब मौत सामने होती है तो कैसा लगता है?

Thu, 25 Aug 2016 08:06 AM IST
भुवन उपाध्याय/ अमर उजाला, पौड़ी
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cloud burst in pauri - फोटो : AmarUjala
पौड़ी जनपद मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर बसे मरोड़ा गांव में सोमवार को रोज की तरह खूब चहल-पहल थी। दोपहर करीब दो बजे से बारिश शुरू हुई। करीब चार बजे अचानक बारिश की रफ्तार बढ़ने लगी।
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ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाए रास्ते

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cloud burst in pauri - फोटो : AmarUjala
आसमान में कड़कती बिजली और तेज आवाज के बीच गांव के ठीक ऊपर बीचोंबीच बादल फटने से गांव दो हिस्सों में बंट गया। ढलान होने से बरसाती पानी मलबा, बोल्डर, पेड़ जो भी रास्ते में आता उसे चपेट में लेते हुए पूरे वेग के साथ बहने लगा। इस हिस्से में ग्रामीणों की गोशालाएं बनी थीं। गोशालाओं में बंधे मवेशी भी बहने लगे। आसपास के घरों से लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित ठौर की ओर भाग पड़े।
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cloud burst in pauri - फोटो : AmarUjala
गांव में दुकान चलाने वाले सुखदेव सिंह रावत अन्य दिनों से पहले ही दुकान बंद करके घर चले गए थे। सुखदेव सिंह घर की देहरी पर भी नहीं पहुंचे थे कि इसी बीच बादल फटने से आए मलबे में उनकी दुकान दब गई। गांव के ऊपर से मलबा तुंण, खड़ीक व अन्य पेड़ों को उखाड़ते हुए गांव की ओर बढ़ा तो ग्रामीण घरों को छोड़कर खेतों की तरफ भाग लिए जिससे कई जानें बच गई। ग्रामीण प्रेमबल्लभ पंत बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी तेज बारिश कभी नहीं देखी।

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cloud burst in pauri - फोटो : AmarUjala
ग्रामीणों की आवाजाही के करीब पांच पुल आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान करके फिलहाल आवाजाही के लिए दो रास्ते बनाए हैं। यह रास्ते अभी कामचलाऊ हैं। 
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गांव के बीच में स्थित पेयजल स्रोत जो कि सोमवार की आपदा  में मलबे में दब गया था। उसे ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान करके मंगलवार को खोल दिया है। हालांकि स्रोत से बहने वाले पानी को एकत्र करने वाला पंदेरा (नौला) आपदा में बह गया है। स्रोत से जैसे-तैसे पानी भर रहे हैं। स्रोत तक आने-जाने का रास्ता भी आपदा में बह गया था। उसे देर शाम करीब सात बजे तक बनाने का कार्य चलता रहा। 
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ग्रामीणों ने सोमवार को ही शिपाल सिंह रावत की छानी मलबे की जद में आ गई थी। ग्रामीणों ने छानी में बंधी दुधारू गाय और बकरी को सकुशल बचा लिया। 
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cloudburst markhula village is in sorrow
रुपसिंह, दयाल सिंह, सुखदेव सिंह, रवींद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह रावत, गोविंद सिंह बिष्ट समेत करीब दस परिवारों के शौचालय बह गए हैं। इनके मकान खतरे की जद में हैं। इन परिवारों ने पड़ोसियों के यहां शरण ले रखी है। 
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cloud burst in pauri - फोटो : AmarUjala
ग्रामीण प्रेमबल्लभ पंत ने बताया कि गांव के लोग मिलजुलकर आपदा राहत कार्यों में जुटे हैं। इसमें सरकार की ओर से जल्द मदद मिल सके तो ग्रामीण फिर से संभल जाएंगे।
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