आदि कैलाश यात्रा और ग्लेशियरों पर ट्रैकिंग के लिए जाने वाले यात्रियों को सीमांत गांवों में ‘होम स्टे’ की सुविधा मिलेगी। सरकार ने सीमांत गांवों के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के लिए यह फैसला किया है। इसका मकसद सीमांत गांवों से पलायन रोकना भी है।
उत्तराखंड सरकार का मानना है कि सीमांत गांवों का आबाद रहना सीमा की सुरक्षा के लिए जरूरी है। होम स्टे के तहत यात्रियों के रहने-खाने का पूरा प्रबंध गांव के लोग करेंगे। यात्रा का आयोजन कराने वाले कुमाऊं मंडल विकास निगम ने तय किया है कि हर यात्री जाते अथवा लौटते वक्त एक बार निगम के गेस्ट हाउस में ठहरेगा और एक बार होम स्टे के तहत गांवों में रात्रि विश्राम करेगा।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने बताया कि आदि कैलाश यात्रा मार्ग में स्थित सिरखा, बूंदी, कुटी, गाला, गुंजी, बाछम, खाती, नामिक आदि गांवों में लगभग हर परिवार को होम स्टे से जोड़ा जा रहा है। निगम इसके लिए फेसिलिटेटर का काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि यात्री निगम के गेस्ट हाउसों से साथ एक बार गांवों में भी होम स्टे करेंगे। होम स्टे के लिए घरों में विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
खुद निगम ने लोगों को बर्तन, बिस्तर सहित अन्य जरूरी सामान मुहैया कराया है और बाकायदा स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इससे यात्रियों को स्थानीय संस्कृति और विशिष्ट भोजन का आनंद भी मिल सकेगा। दूसरी तरफ सीमांत क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गांव में ही सीमित रोजगार प्राप्त हो सकेगा, इससे दूरस्थ गांवों से पलायन पर भी रोक लग सकेगी।
इस साल आदि कैलाश यात्रा नौ जून से शुरू हो रही है। पहला दल नौ जून को दिल्ली से चलकर 10 जून को अल्मोड़ा पहुंचेगा। इस बार आदि कैलाश जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है। पिछले साल जहां 300 लोग आदि कैलाश गए थे वहीं इस बार यह संख्या करीब 500 तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा इन दिनों पंचाचूली, दारमा, मिलम, रालम, पिंडारी, सुंदरढूंगा, नामिक आदि ग्लेशियरों की यात्रा में भी काफी संख्या में लोग जा रहे हैं।