प्रदेश में एकाकी रहने वाले बुजुर्गों के घर जल्द ही पुलिस के सीसीटीवी कैमरों की जद में होंगे। इसके लिए डीजीपी ने विभिन्न फंड का सहारा लेकर कैमरे लगवाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस महीने में दो बार घर जाकर बुजुर्गों के हालचाल भी पूछेगी। इन बुजुर्गों को पुलिस एप के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।
एप पर मौजूद एसओएस इमरजेंसी बटन का इस्तेमाल भी बुजुर्गों को सिखाया जाएगा। बुजुर्गों की सुरक्षा के इंतजामों की समीक्षा हर माह पुलिस मुख्यालय स्तर पर की जाएगी। सुरक्षा में लापरवाही पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बीते दो माह में एकाकी रहने वालीं दो बुजुर्ग महिलाओं की हत्या के बाद पुलिस ने अब उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार की है। इसके लिए मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में बैठक भी की गई।
Haridwar: जहरीली शराब कांड में खुलासा, पंचायत चुनाव से पहले स्प्रिट से बनी शराब से गई थी 12 लोगों की जान
डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि प्रदेश में पुलिस ने 1067 बुजुर्गों को चिन्हित किया है। इसके अलावा 2398 बुजुर्गों ने खुद से पुलिस एप पर रजिस्ट्रेशन कराया है। सभी जिलों को इस सूची को अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस कंपनियों से मिलने वाले सीएसआर फंड या किसी अन्य फंड से बुजुर्गों के घर के आसपास सीसीटीवी का जाल बिछाएगी। इन्हें समय-समय पर चेक किया जाएगा। यदि उनके घर के बाहर कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो इस पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
मोहल्ले के एक व्यक्ति को दें जिम्मेदारी
डीजीपी ने बताया कि थाना पुलिस बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इसके लिए उनके आस-पड़ोस में रहने वाले किसी सामाजिक कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जाएगी। ताकि, वह समय-समय पर बुजुर्गों की निगरानी कर पुलिस को सूचना दे सकें। इसके अलावा सीनियर सिटीजन सेल का डीएसपी महिला सेल को नोडल अफसर बनाया जाएगा।
बनेगा एक निर्धारित प्रारूप
सीनियर सिटीजन की सुरक्षा से संबंधित सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए एक विस्तृत प्रारूप तैयार किया जाएगा। इस प्रारूप के आधार पर संपत्ति या अन्य किसी विवाद होने के संबंध में वरिष्ठ नागरिकों की काउंसिलिंग कर सहायता की जाएगी। इसकी पुलिस मुख्यालय स्तर पर अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था प्रत्येक माह समीक्षा करेंगे।