गुरुवार को शाम चांद के दीदार के साथ माहे रमजान का आगाज हो जाएगा। इसी के साथ शुरू हो जाएगी रमजान की खास नमाज तरावीह। शुक्रवार को पहला रोजा होगा। इस बार पहला रोजा 15 घंटे 41 मिनट का होगा।
रमजान की इस्तकबाल में मुस्लिम इलाके गुलजार हो गए हैं। मस्जिदों और खानकाहों को रोशन किया गया है। शनिवार की तड़के सहरी खाकर पहला रोजा 3:36 बजे से शुरू होगा, जबकि इफ्तार शाम को 7:17 बजे की जाएगी। पौने 16 घंटे भूखे-प्यासे रहकर रोजेदार परवरदिगार की इबादत करेंगे।
इस बार जून-जुलाई की गर्मी की शिद्दत भी रोजेदारों का इम्तिहान लेगी। एक सप्ताह तक सहरी और इफ्तार का यही समय रहेगा। उसके बाद मिनट-दर-मिनट कमी होती रहेगी। रमजान के आखिरी रोजे तक आधा घंटा कम हो जाएगा। गौरतलब यह है कि इस बार रमजान जुमा से शुरू होगा। अगर 29 तारीख (इस्लामी कैलेंडर) का चांद दिखा तो आखिरी रोजा भी जुमे का होगा।
तरावीह की तैयारियां पूरी
तरावीह रमजान की खास नमाज है। इसमें हाफिज हजरात पूरा कुरान शरीफ सुनाते हैं और सभी लोग खामोशी से सुनते हैं। जामा मस्जिद में पेश इमाम मुफ्ती मोहम्मद अली और मस्जिद बंजारान में हाफिज जुनेद तरावीह पढ़ाएंगे। इसके अलावा मैरिज हॉल में दस दिन की तरावीह होगी। मदरसा इशाअत-उल-हक में हाफिज मोहम्मद हाशिम 12 दिन की तरावीह पढ़ाएंगे।
रमजान बरकतों और रहमतों का महीना है। खाने, पीने और सोहबत से बचने का नाम ही रोजा है। जिस तरह रोजे के दौरान बुराइयों से बचना है, उसी तरह पूरे साल खुद को परवरदिगार के फरमान पर चलाना ही रोजे का मकसद है। रोजा बुराइयों के साथ ही बीमारियों से भी बचने का सबब है।
- मौलाना अब्दुल बासित, इमाम जामा मस्जिद बंजारान