जर्मनी में जूनियर महिला हॉकी विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला टीम में उत्तराखंड मूल की वंदना कटारिया का भी अहम योगदान रहा है।
जहां टीम की इस सफलता पर ईनामों की बरसात होने लगी है, वहीं शानदार प्रदर्शन करने वाली उत्तराखंड की इस महिला खिलाड़ी को राज्य में पहचान तक नहीं मिली है।
भारतीय टीम को विश्वकप के सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाली हरिद्वार की वंदना कटारिया को पुरस्कार तो दूर राज्य सरकार से कभी सम्मान तक नहीं मिल सका है। इस कारण वंदना उत्तराखंड की अपेक्षा रेलवे से खेलना अधिक पसंद करती हैं।
शुरुआत खो-खो से हुई
भारतीय जूनियर, सीनियर टीम की जान बन चुकी वंदना कटारिया मूल रूप से हरिद्वार के रोशनाबाद गांव की रहने वाली हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली वंदना के खेल की शुरुआत खो-खो से हुई थी। 2002 में खो-खो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वंदना ने शानदार रिकॉर्ड बनाया था मगर उनके कोच कृष्ण कुमार ने 11 साल की वंदना की तेजी और फुर्ती को देख उनको हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया।
2013 में जर्मनी में हुए जूनियर महिला हॉकी विश्व कप के 4 मैचों में 5 गोल दागकर लेफ्ट इन खेलने वाली वंदना ने अपने खेल का जलवा बिखेरा। रूस के खिलाफ वंदना ने दो गोल दागे थे। स्पेन, न्यूजीलैंड के विरुद्ध भी वंदना गोल कर टीम को जिताने में सफल रहीं। कांस्य पदक जीत इतिहास रचने वाली टीम पर इनामों की बारिश होने लगी है लेकिन राज्य सरकार अब तक अपने इस अनमोल रत्न को नहीं पहचान सकी है।
यहां तक कि कई बार वंदना को सम्मान दिलाने के लिए खेल विभाग को पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन न तो कभी कोई सम्मान ही वंदना को मिल सका और न ही सम्मान, आश्वासन। इस कारण अब वंदना ने उत्तराखंड के लिए खेलना भी छोड़ दिया है।
उत्तराखंड के लिए भी खेले तीन राष्ट्रीय टूर्नामेंट
कोच कृष्ण कुमार ने बताया कि 2002 से 2005 तक वंदना ने रोशनाबाद स्टेडियम में खेल की बारीकियां सीखीं। इस दौरान वंदना ने तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। 2004 में सहारनपुर में हुई ऑल इंडिया टूर्नामेंट में वंदना ने हरियाणा के खिलाफ दो गोल दागकर टीम को जिताया था। खेल सुविधा न मिलने पर 2005 में लखनऊ हॉस्टल में वंदना ने एडमिशन लिया।
2006 में पहली बार इंडिया कैंप में आने के साथ ही वंदना जूनियर टीम में चुनी गईं। 2008 में मुंबई रेलवे ने वंदना को अपने साथ जोड़ा और 2010 में सीनियर टीम की सदस्य बनीं। उन्होंने बताया कि वंदना ऑस्ट्रेलिया में जूनियर चैंपियनशिप, इटली, अमेरिका एवं ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में भी शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं।
खेल से जुड़ा है परिवार
वंदना कटारिया के पिता नाहर सिंह कटारिया बीएचईएल में मास्टर टेक्नीशियन हैं। वंदना उनके सातवें नंबर की संतान हैं। फोन पर नाहर सिंह ने बताया कि उनके चार बेटे और 4 बेटियां हैं। इनमें से 5 खेल से जुड़े हैं। वंदना की बड़ी बहन रीना कटारिया भोपाल एक्सीलेंसी में हॉकी कोच हैं और छोटी बहन अंजलि कटारिया भी हॉकी खिलाड़ी हैं। दो भाई पंकज कटारिया कराटे और सौरभ कटारिया फुटबॉल के खिलाड़ी एवं कोच हैं।