एचएमटी घड़ियों के बंद होने की सुगबुगाहट के साथ ही इसकी सेल भी बढ़ गई है। घड़ियों की बिक्री अचानक बढ़ने से कंपनी ने दामों में दोगुने तक की वृद्धि कर दी है।
बंद होने की खबर से बढ़ी सेल
80 के दशक में एचएमटी वाच ग्रुप की अन्य इकाईयों में मेकेनिकल घड़ियां बननी बंद हो गई थी। एचएमटी रानीबाग में मेकेनिकल घड़ियों का निर्माण होता रहा। वर्ष 90 से 93 के बीच 18 लाख घड़ियां प्रतिवर्ष ग्रुप में बनी। मेकेनिकल घड़ियों समेत डिफेंस के कई आर्डर भी इकाई को मिले।
हाल ही जापान ने 11 सौ मेकेनिकल घड़ियों के आर्डर रानीबाग इकाई को दिए थे। पिछले माह वाच ग्रुप के बंद होने की खबर फैलते ही घड़ियों की बिक्री में तेजी आई है। सूत्रों के अनुसार रानीबाइ इकाई स्थित शोरूम में दिनभर में दो-तीन ही उपभोक्ता आते थे। बंद होने की खबर आने के बाद सेल में तेजी आई है।
सौ से डेढ़ सौ घड़ियां प्रतिदिन बिक रही हैं। एचएमटी ने बिक्री बढ़ने के साथ ही एक अक्तूबर से पायलट, सोना, कोहिनूर और जनता घड़ियों के दाम दोगुने कर दिए हैं। इन घड़ियों की कीमत 1000 से 1100 रुपए के बीच थी।
अब इनकी कीमत 2000 से 2200 सौ रुपए कर दी गई है। इसके अलावा अन्य घड़ियों के दामों में भी 20 से 25 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है।