उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में हिंदी विषय में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले मेधावियों का कहना है कि हिंदी उनकी पहचान की भाषा है। वे सदैव हिंदी से जुड़े रहने के साथ ही उसके विकास और प्रचार-प्रचार के लिए काम करेंगे। उनका करियर क्षेत्र भले ही अलग-अलग हो, लेकिन मातृभाषा हिंदी हमेशा उनके साथ रहेगी। इसके लिए वह अन्य को भी प्रेरित करेंगे।
हाईस्कूल परीक्षा में हिंदी में 99 अंक प्राप्त करने वाली सरस्वती विद्या मंदिर ऊखीमठ की छात्रा ईशा रावत का कहना है कि हिंदी के विकास के लिए नई पीढ़ी को एकजुट होकर काम करना होगा। वे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं, लेकिन हिंदी को बढ़ावा देने के लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगी।
इंटरमीडिएट में हिंदी विषय में सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र हरिशंकर प्रसाद कहते हैं कि हिंदी के बिना हमारी पहचान नहीं हो सकती है। हिंदी में पढ़ना, लिखना सीखा है, लिहाजा इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी हमारी है।
उनके माता-पिता दोनों अलग-अलग विषय के शिक्षक हैं, इसके बावजूद हिंदी के प्रति उनका लगाव अन्य विषयों से अधिक रहा है। छात्र रोशन पंवार का कहना है कि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए स्कूल स्तर पर ठोस प्रयास होने चाहिए। उच्च शिक्षा में भी साइंस, कॉमर्स और कला संवर्ग में हिंदी को अनिवार्य विषय करना चाहिए।