डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’
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उत्तराखंड के रुड़की में पूर्व प्राचार्य एवं प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ ने हिंदी साहित्य में अमिट छाप छोड़ी है। 10 देशों में भारत सरकार की ओर से व्याख्यान दे चुके डॉ. शर्मा को राष्ट्रीय साहित्यक अकादमी द्वारा 2008 में भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार मिला।
अब उन्हें केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा द्वारा विवेकानंद सम्मान के लिए चुना गया है। राष्ट्रपति द्वारा जल्द ही उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। रुड़की में वर्ष 1995 तक बीएसएम पीजी कॉलेज में प्राचार्य रहे डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ ने सेवानिवृत्ति के बाद भी देश और विदेश में अपने कार्यों को और चमकाया।
उन्होंने हिंदी पर 40 से अधिक किताबें लिखीं। उन्होंने मैक्सिको, जापान, कनाडा समेत विभिन्न देशों में व्याख्यान दिए। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। हाल ही में संस्कृत और हिंदी के बीच की भाषा कहलाने वाली प्राकृत अपभ्रंश भाषा में उन्होंने बौद्ध और जैन साहित्य पर लेखन किया है।
इसके लिए उन्हें केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा द्वारा विवेकानंद सम्मान के लिए चयनित किया गया है। इसमें उन्हें पांच लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यही नहीं, उनके कार्यों को देखते हुए हाल ही में उन्हें नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया में ट्रस्टी नियुक्त किया गया है।