जलवायु परिवर्तन के कारण मध्य हिमालयी क्षेत्र के पांच फीसदी जलस्रोत पूरी तरह से सूख गए हैं, और 70 फीसदी जलस्रोतों का पानी आधा रह गया है।
हिमालयी क्षेत्र में बारहों मास जल देने वाली सैकड़ों नदियां मौसमी नाले में तब्दील हो गई हैं। जलस्रोतों की 30 वर्ष के सर्किल का अध्ययन करने केबाद वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है।
वैज्ञानिकों द्वारा पिछले 33 सालों से हिमालयी क्षेत्र के जलस्रोतों पर अध्ययन किया जा रहा है। हिमालय की कोख से निकलने वाले ये जलस्रोत सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों का ही नहीं, दूर मैदानी इलाकों की नदियों का भी परोक्ष रूप से पेट भरने में मदद करते हैं।
वर्ष 1982 में नैनीताल के जलस्रोतों से शुरू इस अध्ययन का नेतृत्व वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी और जलस्रोत विशेषज्ञ डॉ. एसके बरतरिया ने किया। इसमें गढ़वाल मंडल की दून घाटी समेत रुद्र प्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी आदि जिले भी शामिल किए गए।