वैज्ञानिकों की मानें तो हिमालीय क्षेत्रों में साल दर साल तेजी से पहुंच रहा ब्लैक कार्बन हिमालय की पारिस्थितिकी के लिए तो खतरनाक है ही। साथ ही गंगा के मैदानों में रहने वाले करोड़ों लोगों की सेहत के लिए भी खतरनाक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालीय क्षेत्रों में जमा हो रहा ब्लैक कार्बन ग्लेशियरों के पिघलने व पार्टिकुलेट मैटर के तौर पर नदियों के जल के माध्यम से मैदानी क्षेत्रों में भी पहुंच रहा है। जो इंसानों की सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।
शोध में यह बात सामने आई है कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों के अलावा यूरोपीय क्षेत्रों से ब्लैक कार्बन हिमालय क्षेत्रों में पहुंच रहा है। जिसका सीधा असर हिमालय की सेहत पर भी पड़ रहा है। ब्लैक कार्बन के उच्च हिमालीय क्षेत्रों में पहुंचने से ग्लेशियरों के पिघलने की दर में भी तेजी आई है। अध्ययन से पता चलता है कि उच्च हिमालीय क्षेत्रों में ब्लैक कार्बन की मात्रा मौसम के अनुसार 0.01 से लेकर 4.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पाई गई है। जो चिंता का विषय है। यदि ब्लैक कार्बन की मात्रा रोकने को लेकर दुनिया के सभी देशों की ओर से कारगर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हिमालय की सेहत और बिगड़ेगी जिसका सीधा असर इंसानों पर भी दिखाई देगा।
- डॉ. पीएस नेगी, पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी