आईआईटी रुड़की छात्रों के अभियान के दौरान यह भी देखने को मिला था कि गोमुख के पास रखे गए लोहे के बने कूड़ेदान का पेंट आग की तपिश से काला पड़ा था, जो इस बात की ओर संकेत कर रहा था कि इस कूड़े को यहीं पर जलाया जा रहा है।
कूड़े को जलाना जहां प्रदूषण के लिहाज से बेहद हानिकारक है, वहीं प्रदूषण मानकों का भी उल्लंघन है, लेकिन गोमुख के पास का जो नजारा देखने को मिला, वह चिंताजनक था। गोमुख से कुछ दूर पहले दो कूड़ेदान रखे मिले। इन पर लाल और हरे रंग का पेंट किया गया है, लेकिन जब कूड़ेदान में झांककर देखा तो उसमें जला हुआ कूड़ा मिला।
आग के कारण एक कूड़ेदान का पेंट पूरी तरह से पिघलकर मिट चुका था जबकि दूसरे कूड़ेदान का आधा हिस्से का पेंट भी पिघला हुआ था। इससे साफ हो रहा था कि गोमुख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी कूड़े का निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
आईआईटी रुड़की का हिमालयन एक्सप्लोरर क्लब हर साल छात्रों को हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग के लिए भेजता है। पिछले साल ट्रेकिंग के साथ सफाई अभियान का छात्रों का प्रयास सराहनीय रहा है। इस दौरान गोमुख क्षेत्र से छात्रों ने कई क्विंटल कूड़ा भी एकत्र किया था। इस अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि हिमालयी क्षेत्र में कूड़ा मुक्त करने के साथ ही आम लोगों को भी जागरूक किया जा सके।
-प्रो. एम परीदा, उपनिदेशक आईआईटी रुड़की