‘उत्तराखंड, परमार्थ आध्यात्मिक ऊर्जा के स्रोत’
उत्तरप्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि परमार्थ निकेतन और उत्तराखंड अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा के स्रोत हैं। मेरा मन नहीं होता कि इस पवित्र और शांतिप्रिय स्थान को छोड़कर कहीं और जाऊं। परमार्थ निकेतन आकर मुझे ऐसे लगता है, जैसे मां गंगा मुझे अपने आप में समाहित कर रही है। उन्होंने लोगों से हर शुभ कार्य से पहले पौधरोपण और भारत को प्लास्टिक मुक्त करने की अपील की।
‘हिमालय संग मूल निवासियों का संरक्षण जरूरी’
हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि हिमालय के संरक्षण के लिए जन आंदोलन और सरकार की भागीदारी जरूरी है। हमें विकास के आदर्श मॉडल को तैयार करना होगा। देश में विकास और पारिस्थितिकी विकास साथ हो, इसके लिए समाज और सरकार दोनों को चिंतन करना होगा। कहा कि हिमालय के संरक्षण के साथ, वहां के मूल निवासियों का संरक्षण भी बेहद जरूरी है, जिसके लिए विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाना होगा।
ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण पर जताई चिंता
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने ग्लोबल वार्मिंग, ऋतु चक्र में बदलाव और बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रकृति पर्यावरण के साथ ही हिमालय के ग्लेशियर का संरक्षण भी बहुत जरूरी है। कहा कि एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान है, इसलिए हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करने के साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
1975 के बाद से द्रव्यमान का 18 फीसदी खोया
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बताया कि हिमालय एशिया के 18 देशों के लिए एक जलवायु रक्षक के रूप में कार्य करता है। अथक प्रयासों की बदौलत पहाड़ों ने क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के सबसे कठिन समय में बचाया है, लेकिन फिर भी हिमालय के ग्लेशियरों ने 1975 के बाद से अपने द्रव्यमान का 18 प्रतिशत खो दिया है। बताया कि इन जल बैंकों के पिघलने की दर में हाल ही में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है।
सीएम को दी एकल हनुमान की उपाधि
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को गदा भेंट कर एकल हनुमान की उपाधि दी। मुख्यमंत्री ने भी गदा को कंधे पर रखकर हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि मुझे ही नहीं, हम सभी को हिमालय संरक्षण के लिए हनुमान बनने की जरूरत है।
हिमालय के समग्र विकास का चिंतन जरूरी
हिमालय दिवस के कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हिमालय को समझने वाला हर व्यक्ति जानता है कि यदि इससे छेड़छाड़ की गई तो गंभीर परिणाम सामने आएंगे। सामुदायिक भागीदारी निभाकर ही हिमालय का संरक्षण किया जा सकता है। हिमालयीय विवि में हिमालय दिवस के पर पौधरोपण भी किया गया। कार्यक्रम कुसुमकांता फाउंडेशन और मंथन सोसाइटी की ओर से आयोजित किया गया। मैती आंदोलन के पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने हिमालय दिवस मनाने के महत्व और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कहा कि हमें अपने स्रोतों, नदियों आदि को प्रदूषित होने से बचाने की जरूरत है। कार्यक्रम में फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, कुलाधिपति प्रो पीके भारद्वाज, डॉ. राजेश नैथानी, प्राचार्य डॉ. एके झा, डॉ. ममता कुंवर आदि थे।