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Himalaya Day 2022: सीएम ने किया शिखर सम्मेलन का शुभारंभ, कहा-प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण को बनेगी कमेटी

Fri, 09 Sep 2022 11:45 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, मुनिकीरेती (ऋषिकेश)

सार

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड से निकलते हुए गंगा के स्वरूप में परिवर्तन आता चला जाता है, लेकिन नमामि गंगा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा को दूषित होने से बचाने के लिए बड़ी पहल की है।
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सीएम धामी पहुंचे परमार्थ निकेतन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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परमार्थ निकेतन आश्रम में हिमालय दिवस पर आयोजित तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय किसी राज्य और देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का है। हिमालय का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है। हिमालयी क्षेत्रों में पारिस्थितिकी और आर्थिकी को ध्यान में रखकर सामाजिक विकास पर जोर देने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने हिमालय के प्राकृतिक नौलों (जल स्रोतों), धारों, नालों के अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन के लिए कमेटी के गठन करने की बात कहीं।

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शुक्रवार को परमार्थ निकेतन में हिमालय शिखर सम्मेलन का आगाज हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तरप्रदेश की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्या, वन मंत्री सुबोध उनियाल, आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, हेस्को प्रमुख पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी ने संयुक्त रूप से सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित कई प्रांतों से आए लोगों को हिमालय के संरक्षण की शपथ दिलाई। सीएम ने कहा कि हिमालय हमारे पिता हैं, अपने पिता के संरक्षण के लिए हम सभी को संकल्पित होना होगा। गंगा को भी मां के स्वरूप में पूजते हैं। 



कहा कि उत्तराखंड से निकलते हुए गंगा के स्वरूप में परिवर्तन आता चला जाता है, लेकिन नमामि गंगा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा को दूषित होने से बचाने के लिए बड़ी पहल की है। कहा कि उत्तराखंड से गंगा का निर्मल जल प्रवाहित रहे, इसके लिए सभी को गंगा केे प्रदूषण मुक्त करने का प्रण लेना होगा।  सीएम ने कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव, ग्लोबल वार्मिंग के साथ ही जल, जंगल, जमीन से जुड़े विषयों पर समेकित चिंतन की जरूरत है। कहा कि हमें हिमालय की जैव विविधता को बचाना है, क्योंकि जब हिमालय बचेगा तभी हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा। 

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‘हिमालय है तो हम हैं, हिमालय है तो गंगा है’
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने अलास्का, आइसलैंड और हिमालय के पिघलते ग्लेशियरों पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हिमालय का प्रहरी और पहरेदार बनना होगा, क्योंकि हिमालय है तो हम हैं और हिमालय है तो गंगा है। कहा कि उत्तर भारत की अधिकांश नदियां हिमालय से ही निकलती हैं। बर्फ की सफेद चादरों से ढके हिमालय की गोद में भारत की आत्मा बसती है। हिमालय हमारी प्राणवायु का स्रोत ही नहीं, बल्कि भारत की बड़ी आबादी की प्यास बुझाता है। हम सभी को मिलकर पीस टूरिज्म, ऑक्सीजन टूरिज्म, योग और ध्यान टूरिज्म को बढ़ावा देना होगा। 

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‘उत्तराखंड, परमार्थ आध्यात्मिक ऊर्जा के स्रोत’ 
उत्तरप्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि परमार्थ निकेतन और उत्तराखंड अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा के स्रोत हैं। मेरा मन नहीं होता कि इस पवित्र और शांतिप्रिय स्थान को छोड़कर कहीं और जाऊं। परमार्थ निकेतन आकर मुझे ऐसे लगता है, जैसे मां गंगा मुझे अपने आप में समाहित कर रही है। उन्होंने लोगों से हर शुभ कार्य से पहले पौधरोपण और भारत को प्लास्टिक मुक्त करने की अपील की।

‘हिमालय संग मूल निवासियों का संरक्षण जरूरी’
हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि हिमालय के संरक्षण के लिए जन आंदोलन और सरकार की भागीदारी जरूरी है। हमें विकास के आदर्श मॉडल को तैयार करना होगा। देश में विकास और पारिस्थितिकी विकास साथ हो, इसके लिए समाज और सरकार दोनों को चिंतन करना होगा। कहा कि हिमालय के संरक्षण के साथ, वहां के मूल निवासियों का संरक्षण भी बेहद जरूरी है, जिसके लिए विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाना होगा।

ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण पर जताई चिंता
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने ग्लोबल वार्मिंग, ऋतु चक्र में बदलाव और बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रकृति पर्यावरण के साथ ही हिमालय के ग्लेशियर का संरक्षण भी बहुत जरूरी है। कहा कि एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान है, इसलिए हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करने के साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

1975 के बाद से द्रव्यमान का 18 फीसदी खोया
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बताया कि हिमालय एशिया के 18 देशों के लिए एक जलवायु रक्षक के रूप में कार्य करता है। अथक प्रयासों की बदौलत पहाड़ों ने क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के सबसे कठिन समय में बचाया है, लेकिन फिर भी हिमालय के ग्लेशियरों ने 1975 के बाद से अपने द्रव्यमान का 18 प्रतिशत खो दिया है। बताया कि इन जल बैंकों के पिघलने की दर में हाल ही में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है। 

सीएम को दी एकल हनुमान की उपाधि
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को गदा भेंट कर एकल हनुमान की उपाधि दी। मुख्यमंत्री ने भी गदा को कंधे पर रखकर हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि मुझे ही नहीं, हम सभी को हिमालय संरक्षण के लिए हनुमान बनने की जरूरत है।

हिमालय के समग्र विकास का चिंतन जरूरी
हिमालय दिवस के कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हिमालय को समझने वाला हर व्यक्ति जानता है कि यदि इससे छेड़छाड़ की गई तो गंभीर परिणाम सामने आएंगे। सामुदायिक भागीदारी निभाकर ही हिमालय का संरक्षण किया जा सकता है। हिमालयीय विवि में हिमालय दिवस के पर पौधरोपण भी किया गया। कार्यक्रम कुसुमकांता फाउंडेशन और मंथन सोसाइटी की ओर से आयोजित किया गया। मैती आंदोलन के पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने हिमालय दिवस मनाने के महत्व और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कहा कि हमें अपने स्रोतों, नदियों आदि को प्रदूषित होने से बचाने की जरूरत है। कार्यक्रम में फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, कुलाधिपति प्रो पीके भारद्वाज, डॉ. राजेश नैथानी, प्राचार्य डॉ. एके झा, डॉ. ममता कुंवर आदि थे।
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