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उत्तराखंड में हर दूसरा आदमी पीता है शराब

Wed, 22 Oct 2014 08:03 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश
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अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड में 52 फीसदी लोग रिकॉर्ड शराब पी रहे हैं। मगर सरकार इसकी रोकथाम के उपाय नहीं कर रही है।
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राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी की 54वीं वार्षिक कांफ्रेंस (नाम्सकोन-2014) एम्स की ऋषिकेश शाखा में शुरू हो गई। पहले दिन ‘शराब के दुष्प्रभाव तथा प्रमाण पर आधारित राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता’ विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान देश के बड़े डॉक्टरों ने उत्तराखंड में शराब की खपत के बारे में बताया।

देश के जाने माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शराब से स्वास्थ्य, समाज और देश पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर व्याख्यान दिए। बताया गया कि कांफ्रेंस में चिकित्सा विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर शराब के बढ़ते प्रचलन को कम करने के लिए राष्ट्रीय नीति का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जिसे एनएएमएस केंद्र सरकार को सौंपेगी।
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तीन दिवसीय कंटीन्यू मेडिकल एजूकेशन (सीएमई) का अकादमी के अध्यक्ष सीएस भास्करानंद ने औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि शराब पीने से लीवर, आंत, मांसपेशियों, ब्रेन आदि को नुकसान के साथ व्यक्ति डिप्रेशन में पहुंच जाता है।

17 से 40 आयुवर्ग के 40 प्रतिशत लोग शराबी

महिलाओं द्वारा प्रेगनेंसी में एल्कोहल लेने से बच्चे के ब्रेन और शारीरिक संरचना पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। एम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने बताया कि उत्तराखंड में 17 से 40 आयुवर्ग के 40 प्रतिशत लोग शराब का सेवन कर रहे हैं।

उत्तराखंड में अन्य राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक 52 फीसदी लोग रिकॉर्ड शराब का प्रयोग कर रहे हैं, मगर सरकार इसकी रोकथाम के उपाय नहीं कर रही।

उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालने वाली शराब पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकारें कोई प्रयास नहीं कर रहीं, वह राजस्व के फेर में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही हैं।

ऐसे में एनआरएसएम, इंटरनेशनल लेवर आर्गेनाइजेशन, ड्रग कंट्रोल आर्गेनाइजेशन को इस दिशा में काम करने की जरूरत है। कांफ्रेंस के दौरान शराब से जुड़ी सामाजिक बुराई, दुष्प्रभाव तथा चिकित्सा प्रबंधन और निदान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
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खपत रोकने के लिए सरकार को करनी होगी पहल

शराब की लत छुड़वाने के लिए लोगों को किस तरह से प्रेरित किया जाए, इस पर भी विस्तृत विमर्श किया गया। वक्ताओं ने शराब की खपत रोकने के लिए सरकारी स्तर पर भी पहल करने की बात कही।

कांफ्रेंस में आईएचबीएएस के निदेशक डॉ. निमेश देसाई, दिल्ली एम्स के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार चड्ढा, नाम्स के डॉ. कमल बख्शी, जीएसवी मेडिकल कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर (डॉ.) ओम कुमार गुप्ता, विवेकानंद ड्रग नशा मुक्ति केंद्र के अध्यक्ष डॉ. श्रीधर शर्मा आदि ने एल्कोहल के दुष्प्रभाव और रोक विषय पर व्याख्यान दिए।

कार्यशाला में करीब 250 चिकित्सा विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. शालिनी राव, डॉ. विनय कुमार बस्तिया, एम्स की डीन डॉ. लतिका मोहन, डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, डॉ. शोभा अरोड़ा आदि मौजूद थे।

एम्स परिसर में आयोजित तीन दिवसीय सीएमई का राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने शुभारंभ किया।
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