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उत्तराखंड की बेटी ने देश को दिखाई नई राह

Wed, 07 Jan 2015 09:32 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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टिहरी झील में प्राकृतिक रेडियोएक्टिव पदार्थों की वजह से मंडरा रहे खतरे पर दसवीं की छात्रा पूजा नेगी की शोध रिपोर्ट पूरे देश में लागू हो गई है। अब हर नई बांध परियोजनाओं को इस रिपोर्ट की कसौटी पर भी परखा जाएगा। सभी वैज्ञानिकों ने इसके लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को सहमति दे दी है।
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टिहरी के धारकोट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज की छात्रा पूजा ने शिक्षक डॉ. मनबीर नेगी के साथ तीन से सात जनवरी तक मुंबई विश्वविद्यालय में आयोजित हुई भारतीय विज्ञान कांग्रेस में यह शोध प्रस्तुत किया था। टिहरी झील में जमा हो रहे प्राकृतिक रेडियोएक्टिव पदार्थों से आसपास की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है।

डॉ. मनबीर सिंह नेगी ने बताया कि शोध में सामने आया कि बांध बनाने वाले टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) ने भी इस पहलू पर ध्यान नहीं दिया था। इस पहलू पर कुछ शोध कार्य तो हुए हैं, लेकिन ठोस नतीजे सामने नहीं आए थे। इसलिए वैज्ञानिक भी पूजा के शोध से प्रभावित हुए।
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देश भर के 35 बाल वैज्ञानिकों के साथ पूजा को भी किशोर वैज्ञानिक पुरस्कार से नवाजा गया। इस विज्ञान कांग्रेस का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसमें देशभर के वैज्ञानिकों और करीब दो हजार बाल वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग किया।

दो गांवों पर मंडरा रहा कैंसर का खतरा

पूजा ने टिहरी झील के पास के चार गांवों में जाकर सर्वेक्षण किया। झील के दायीं और बायीं तरफ के दो-दो गांव लिए। सर्वे में सामने आया कि रेडियोएक्टिव पदार्थों की वजह से झील से 200 मीटर ऊंचाई तक वाले गांवों में प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ गया है।

झील की सतह से 125 मीटर ऊंचाई वाले गांव सांधणा और 175 मीटर ऊंचाई वाली कोटी कालोनी में प्रदूषण की वजह से फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ गया है। पूजा ने इन गांवों में गढ़वाल विवि के शोध के आंकड़ों का भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया। दोनों गांवों का जल्द ही विस्थापन न हुआ तो यह एक बड़ी आपदा साबित हो सकता है।

विज्ञान कांग्रेस में शामिल वैज्ञानिक शोध की पद्धति से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने इसी पद्धति को नए बांधों के निर्माण में प्रयोग करने पर सहमति दी। साथ ही यह भी नसीहत दी कि भविष्य में बनने वाले बांधों के 200 मीटर दायरे के सभी गांव पूर्ण रूप से विस्थापित कर दिए जाएं।
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भागीरथी, भिलंगना में हैं खतरनाक तत्व

पूजा के शोध में बताया गया कि भागीरथी और भिलंगना नदी के पानी और मिट्टी में प्राकृतिक रेडियोएक्टिव पदार्थ मौजूद हैं। यह पानी के साथ बहकर झील में एकत्र हो रहे हैं। इन खतरनाक पदार्थों की वजह से सांस और दूसरी बीमारियां का खतरा 50 गुना बढ़ गया है।

पूजा को मिलेगी छात्रवृत्ति
किशोर वैज्ञानिक पुरस्कार प्रतिभावान पूजा के लिए फायदेमंद साबित होगा। विज्ञान में पढ़ाई और शोध करने पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग(डीएसटी) की ओर से पूरा शुल्क दिया जाएगा। इसके अलावा एमबीबीएस या इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने पर भी डीएसटी की ओर से छात्रवृत्ति दी जाएगी।
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