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उत्तराखंड: उत्तरकाशी में बादल फटा, कई घर जमींदोज, आठ की मौत, 17 लोग लापता

Mon, 19 Aug 2019 08:40 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने से कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों मकान पानी के सैलाब में समा गए। रविवार देर शाम तक आराकोट और माकुड़ी से आठ लोगों के शव बरामद हो चुके थे। जबकि क्षेत्र में अलग-अलग जगह 15 से 17 लोगों के बहने और मलबे में दबने की सूचना है।

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दर्जनों संपर्क मार्ग व पुल बहने से सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव-घरों में ही कैद हो गए हैं। पेयजल और बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। वहीं मौके पर भेजी गईं आपदा प्रबंधन टीमें संपर्क मार्ग कटे होने के कारण रविवार देर शाम मौके पर पहुंच पाईं। जिसके बाद राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था।

जिले के मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने के बाद माकुड़ी गांव के गदेरे में आए उफान से कई मकान जमींदोज हो गए। आपदा प्रबंधन दल में शामिल भगत सिंह रावत ने बताया कि माकुड़ी गांव में मलबे में दबे पांच लोगों के शव बरामद हो गए हैं। इनकी पहचान चतर सिंह (55) पुत्र कुंदन सिंह, उनकी पत्नी कलावती (45), कलावती (35) पत्नी किशन सिंह, ऋतिका (17) पुत्री किशन सिंह और सरोजनी देवी (31) पत्नी उपेंद्र सिंह के रूप में हुई है।
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जबकि माकुड़ी गांव से जोगड़ी देवी (75) पत्नी कुंदन सिंह और नेपाली मूल के लाल बहादुर लापता हैं। उन्होंने बताया कि आराकोट में सोमा देवी (38) पत्नी मोहन लाल, नेपाली मूल के कालूराम (60) और सोबित (1) पुत्र रोहित के शव बरामद हुए हैं। यहां से राइंका आराकोट में प्रवक्ता बिजनौर निवासी बृजेंद्र कुमार (55) एवं उनकी पुत्री संगीता (30) के भी बाढ़ में बहने की सूचना है। आपदा प्रबंधन की टीम अन्य गांवों तक पहुंच कर आपदा में हताहत हुए लोगों को रेस्क्यू करने और उनकी जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

निकटवर्ती मौंडा गांव निवासी आशीष चौहान ने बताया कि वहां दर्जनों ग्रामीणों के सेब के बागीचे तबाह होने के साथ ही मकान भी मलबे से खतरे की जद में आ गए हैं। मौंडा के निकट खक्वाड़ी, बलावट एवं झोटाड़ी गांव में भी भारी नुकसान हुआ है। चिवां गांव के आंद्री खड्ड में आए उफान से मोटर पुल के साथ ही एक ट्रक भी बह गया है।

इन गांवों से नीचे टिकोची बाजार में मलबा घुसने से यहां राजकीय इंटर कालेज भवन के साथ ही एक दर्जन से ज्यादा आवासीय एवं व्यवसायिक भवन मलबे की भेंट चढ़ गए हैं। यहां सड़क पर खड़े कई वाहन भी उफान में बह गए। ग्रामीणों ने पहाड़ी की ओर भाग कर अपनी जान बचाई, लेकिन कुछ लोगों के बाढ़ में बहने या मलबे में दबने की आशंका जताई जा रही है। आराकोट खड्ड में आए उफान से पाबर नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने पर नदी का पानी आराकोट बाजार में घुस गया।

कई लोग बहे

पाबर नदी में उफान से ईशाली गांव को जोड़ने वाला झूला पुल भी खतरे की जद में है। डगोली गांव निवासी सियाराम नौटियाल ने बताया कि डगोली गांव खतरे की जद में आने से ग्रामीण पहाड़ी पर शरण लिए हुए हैं। क्षेत्र में अतिवृष्टि से गाड़ गदेरों में भारी उफान आने से क्षेत्र में पाबर और टौंस नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए देहरादून प्रशासन ने त्यूणी बाजार का नदी की ओर वाला हिस्सा खाली करा दिया है।

उत्तरकाशी की सीमा पर भी कुछ मजदूर और वाहन बहे
हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित मोरी उत्तरकाशी के सनेल गांव में कोठीगाड़ खड्ड में लगे स्टोन क्रशर में काम करने वाले तीन डंपर एवं दो जेसीबी मशीनों समेत कुछ मजदूरों के भी बाढ़ में बहने की सूचना है।

सनेल निवासी डा. राजेंद्र राणा ने बताया कि शनिवार देर रात को क्षेत्र के गाड़ गदेरों के साथ ही पाबर नदी में आए उफान से क्षेत्र में भारी तबाही मची है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश की सीमा पर कोठीगाड़ में स्टोन क्रशर लगा है। शनिवार रात आए उफान में क्रशर में काम करने वाले तीन डंपर और दो जेसीबी मशीन बाढ़ में बह गई। इस आपदा में यहां कार्य कर रहे कुछ मजदूरों और मशीन ऑपरेटरों के बहने की भी सूचना है। हिमाचल प्रदेश की पुलिस और रेस्क्यू टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी है।

दर्जनों गांवों से संपर्क टूटा
क्षेत्र के माकुड़ी, चिवां, मौंडा, बलावट, खक्वाड़ी, टिकोची, आराकोट, डगोली, गोकुल, दुचाणू, मैंजणी, जागटा आदि गांवों को आने-जाने वाले संपर्क मार्ग भी नहीं बचे, जिससे सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव में ही कैद होकर रह गए हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें इन गांवों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हुई है।

रास्ते में ही फंस गईं रेस्क्यू टीमें
आराकोट क्षेत्र तक पहुंचने वाली सड़कें जगह-जगह अवरुद्ध होने के कारण रविवार देर शाम तक भी प्रशासन एवं रेस्क्यू टीमें मौके तक नहीं पहुंच पाईं। आपदा की सूचना मिलते ही डीएम ने बड़कोट, पुरोला एवं मोरी से रेस्क्यू टीमों को आराकोट की ओर रवाना कर दिया था, लेकिन मोरी से 33 किमी आराकोट की ओर डार्मीगाड़ में एक लोडेड ट्रक के सड़क के बीच फंसने के कारण यहां करीब दो घंटे तक यातायात अवरुद्ध रहा। यहां से आगे पंद्राणू में सड़क अवरुद्ध होने के कारण देर शाम तक भी सभी टीमें यहीं फंसी रहीं। इस हाल में आपदाग्रस्त क्षेत्र में अभी तक राहत एवं बचाव कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।

मोरी के आराकोट क्षेत्र में अतिवृष्टि से काफी नुकसान की सूचना मिली है। जिले से राजस्व के साथ ही एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमें मौके लिए रवाना कर दी गई हैं। यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश से नजदीक होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य के लिए वहां के प्रशासन से भी संपर्क किया जा रहा है। आपदा में कई लोगों के लापता होने की सूचना मिल रही है। राजस्व की टीम मौके पर पहुंचने पर ही इनकी पुष्टि हो पाएगी। फिलहाल दो शव बरामद हुए हैं। आपदा के हालात को लेकर शासन को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ.आशीष चौहान, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी

उफान पर नदियां, त्यूनी में 35 परिवारों को किया शिफ्ट

भारी बारिश के बाद से अब अलकनंदा, पिण्डर, धोली,नंदाकनी, बालखिला नदियां उफान पर हैं। वहीं, सडकों पर मलबा आने से चमोली में 19 सडकें भी बंद हैं। उत्तरकाशी में भी जिले के अधिकांश हिस्सो में सुबह से बारिश का सिलसिला जारी है। गंगोत्री राजमार्ग चुंगी-बड़ेथी के पास मलबा और पत्थर आने से बंद हो गया है। 

वहीं,  गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच भूस्खलन का खतरा देखते हुए यात्रियों को पड़ावों पर रोका गया है। सुबह 8 बजे तक गौरीकुंड से 230 श्रद्धालुओं ने धाम के लिए प्रस्थान किया था। बारिश के चलते रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी पर बना पुराना झूला पुल टूटा गया है। 

त्यूनी में भी टोंस नदी के उफान पर पर आने से कई घर खतरे की जद में आ गए हैं। तहसील प्रशासन ने 35 परिवारों के घरों को खाली कराकर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। अपर जिलाधिकारी रामजी शरण ने बताया कि बादल फटने के कारण एक महिला मलबे में दब गई है। खतरे को देखते हुए त्यूनी बाजार को भी खाली कराया गया है।
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अगले 24 घंटे में नौ जिलों में भारी बारिश

प्रदेश के नौ जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट के अनुसार देहरादून के साथ नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पौड़ी जिलों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। 

हरिद्वार, टिहरी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि देहरादून और आसपास के इलाकों में दो से तीन दौर की तेज बारिश हो सकती है। इस दौरान चमक और गरज के साथ तेज बौछारें पड़ सकती है। 

बता दें कि पहाड़ों की रानी मसूरी में भी कैंपटी-यमुनोत्री मार्ग भारी भूस्खलन के बाद बंद हो गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन जेसीबी के माध्यम से सड़क पर आए मलबे को हटाने में जुटा है। वहीं इसके कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई है। 

नई टिहरी और आसपास के क्षेत्रों में भी रातभर से बारिश का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री हाईवे ओजरी डबरकोट में भी बंद हो गया है। यमुना नदी के साथ-साथ सहायक नदी -नाले भी उफान पर हैं। चमोली जिले में भी भारी बारिश के चलते बदरीनाथ नेशनल हाईवे लामबगड़ और पीपलकोटी से टंगणी मे अवरुद्ध हो गया है। वहीं चंपावत में भी धौन के पास हाईवे मलबा आने से रास्ता बंद हो गया है।
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