देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को लेकर सरकार गंभीर है। जल्द ही इन पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। यह कहना है केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा का। वह केंद्रीय मंत्री बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से देहरादून में सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित अधिवक्ताओं के सेमिनार एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जनता को त्वरित व सुलभ न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने की आवश्यकता है। 21 वीं सदी में फास्ट एवं ग्लोबलाईज एक्टिविटी पर कार्य करने की जरूरत है और इसके लिए सभी को अभी से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि छह कार्यदिवसों के भीतर चार न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है।
अगले छह महीने के भीतर अन्य रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। न्यायाधीशों के इन रिक्त पदों को कोलेजियम के जरिए ही भरा जाएगा।
खत्म होंगे गैरजरूरी कानून, हर राज्य में लॉयर्स एकेडमी
सदानंद गौड़ा
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केंद्रीय मंत्री ने बदलते दौर में कानून में संशोधन की भी आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिनियम जो अप्रसांगिक हो गए हैं उसे समाप्त कर उसमें बदलाव किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने अदालतों में लंबित मुकदमों पर चिंता जताते हुए कहा कि ट्रिब्यूनलों के जरिये विभिन्न मामलों का निस्तारण किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक राज्य में लॉयर्स एकेडमी खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ता अपनी सीखने की प्रवृत्ति को बनाए रखें और अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करें।
सेमिनार में कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद विमलेश कुमार शुक्ला, मुख्य न्यायाधीश कर्नाटक हाईकोर्ट एसके मुखर्जी, न्यायमूर्ति उत्तराखंड हाईकोर्ट सुधांशु धुलिया, न्यायमूर्ति वीके बिष्ट, चेयरमैन बार काउंसिल ऑफ इंडिया मनन कुमार, एडवोकेट जनरल विजय बहादुर सिंह नेगी, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष अपूर्व कुमार शर्मा, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मैनेजिंग ट्रस्टी विजय भट्ट, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की विशेष कमेटी के सदस्य चंद्रशेखर तिवारी, हरीश नेगी आदि मौजूद रहे।
वर्तमान प्रक्रिया के तहत होगी नियुक्ति
जज के 458 पद खाली हैं।
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देश के विभिन्न 24 उच्च न्यायालयों में जजों के 1079 स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में 621 जज कार्यरत हैं। जजों के 458 पद रिक्त हैं। केंद्रीय न्याय एवं कानून मंत्री ने कहा कि जब तक नया प्रावधान नहीं बनता तब तक वर्तमान प्रक्रिया के तहत ही जजों की नियुक्ति की जाएगी।
अदालतों में 7.2 करोड़ मुकदमे लंबित
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि देश की विभिन्न अदालतों में 7.2 करोड़ मुकदमे लंबित हैं। इसमें केवल विभिन्न उच्च न्यायालयों में 38 लाख मामले लंबित हैं। मुकदमों के लंबित होने की एक बड़ी वजह अदालतों में जजों की कमी है।
एडवोकेट एक्ट में होगा संशोधन
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने कहा कि एडवोकेट एक्ट में संशोधन किया जा रहा है। इसके बाद युवा वकीलों के लिए तीन महीने की ट्रेनिंग अनिवार्य होगी।
वकीलों एवं लॉ छात्रों के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से उत्तराखंड में पहली बार इस तरह का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है, इससे युवा वकीलों को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
-चंद्रशेखर तिवारी, विशेष कमेटी सदस्य बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड