नर्सों की ओर से हड़ताल वापस लिए जाने पर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें दोबारा हड़ताल न करने की कड़ी चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि उन्हें हड़ताल करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की अधिवक्ता लता नेगी ने पूर्व में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि विगत दिनों से प्रदेश की नर्सेज अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जो गलत है।
इस प्रकरण में पूर्व में एसोसिएशन की ओर से कोर्ट में शपथपत्र के माध्यम से कहा गया था कि उनकी मांगों को सरकार पूरा नहीं कर रही है, जिस कारण हड़ताल करनी पड़ रही है।
जबकि सरकार की ओर से कहा गया कि नर्सों की कुछ मांगों को मान लिया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद नर्सों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली थी। पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।