हेरोइन तस्करों के सबसे बड़े ग्राहक दून के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और हॉस्टल में रहने वाले छात्र हैं। खास बात यह है कि पुलिस से बचने के लिए ये तस्कर टिफिन और पेन के अंदर हेरोइन और दूसरे नशीले पदार्थ छात्रों को सप्लाई करते हैं।
युवकों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि छात्रों तक अपनी पैठ बनाने के लिए तस्करों ने कुछ छात्रों को साथ मिला लिया है। कुछ टिफिन सर्विस वाले भी तस्करों से मिले हैं।
छात्र और मजदूर नशे के आदी
नशे के बड़े कारोबारी पर्दे के पीछे रहकर छात्रों और मजदूरों को नशे का आदी बना रहे हैं। युवकों ने बताया कि तस्कर तीन हजार रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से हेरोइन खरीददते हैं। इसकी छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर पांच-पांच सौ रुपये में बेची जाती है।
मुफ्त में लगाते हैं नशे की लत
युवकों ने बताया कि नशे के सौदागर छात्रों को फांसने के लिए शुरुआत में मुफ्त में हेरोइन, स्मैक जैसे नशीले पदार्थ उपलब्ध कराते हैं। लत लग जाने के बाद छात्रों से बड़ी रकम वसूली जाती है। बताया जा रहा है कि शुभम सेमवाल भी इसी तरह तस्करों के चंगुल में फंसा था।