कोरोना की बंदिशों के दो साल बाद 22वां विरासत आर्ट एंड हेरिटेज महोत्सव संस्कृति को संजोए हुए दौर के साथ शुक्रवार से शुरू हो गया। महोत्सव रीच के संस्थापक सदस्य स्वर्गीय संजीव कुमार सिंह (आईपीएस) और कार्यकारी सदस्य स्वर्गीय राजश्री जोशी को समर्पित किया गया।
कौलागढ़ रोड स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेडियम में आयोजित 15 दिवसीय विरासत महोत्सव का शुभारंभ ओएनजीसी की प्रबंध निदेशक डॉ. अलका मित्तल और डीजीपी अशोक कुमार ने दीप जलाकर किया। इस मौके पर डीजीपी ने कहा कि बीते 22 साल में विरासत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। विरासत लोगों के लिए छोटी-छोटी बातों में बड़ी खुशियां तलाशने में मददगार साबित होने लगा है। इस मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत विशेष रूप से कोरियोग्राफ किए गए प्रारंभ की प्रस्तुति अन्वेषना डांस थिएटर की ओर से किया गया।
संगीता शर्मा के नेतृत्व में उत्तराखंड का लोकप्रिय छोलिया नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहा। अन्वेषना डांस थिएटर की ओर से भरतनाट्यम, ओडिसी, मोहिनीअट्टम, कुचीपुड़ी, कलारी पयट्टू और अन्य नृत्य प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संस्था की ओर से ओएनजीसी की प्रबंध निदेशक डॉ. अलका मित्तल को विरासत के प्रति उनके योगदान के लिए विरासत सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन रीच के महासचिव आरके सिंह ने किया।
कई प्रांतों के स्टॉल भी लगाए गए
महोत्सव में भारत के कई प्रांतों से आईं संस्थाओं ने स्टाल लगाए। स्टालों पर लोगों ने भारत की विविधताओं का आनंद उठाया। कई प्रकार के व्यंजन, हथकरघा एवं हस्तशिल्प के स्टाल, अफगानी ड्राई फ्रूट, पारंपरिक क्राकरी और नागालैंड के बंबू क्राफ्ट मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे।
भारत की कला संस्कृति का संरक्षण विरासत
रीच की स्थापना 1995 में देहरादून में हुई थी। इसके बार से रीच देहरादून में विरासत महोत्सव का आयोजन करता आ रहा है। विरासत का उद्देश्य भारत की कला, संस्कृति और विरासत के मूल्यों को बचाना है। रीच के महासचिव आरके सिंह ने बताया कि विरासत महोत्सव कई ग्रामीण कलाओं को पुनर्जीवित करने में सहायक रहा। विरासत हमारे गांव की परंपरा, संगीत, नृत्य, शिल्प, पेंटिंग, मूर्तिकला, रंगमंच, कहानी सुनाना, पारंपरिक व्यंजन आदि को सहेजने एवं आधुनिक जमाने के चलन में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।