उत्तराखंड शासन भी इस दिशा में गंभीर नजर नहीं आया
यहां हवा की दिशा और दबाव की जानकारी सही से नहीं मिल पाती है, लेकिन केदारनाथ पुनर्निर्माण के दौरान भी यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम की स्थापना तो दूर किसी ने आज तक इस विषय पर कोई चर्चा तक नहीं की है। हैरत यह है कि नागरिक उड्डयन विभाग, उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथह्यॉरिटी (यूकाडा) और उत्तराखंड शासन भी इस दिशा में कभी गंभीर नजर नहीं आया है। इन हालात में यात्राकाल में केदारनाथ में एमआई-26 हेलीपैड पर झंडी लगाकर हवाई कंपनियों के कर्मचारी हवा की दिशा का अनुमान लगाकर अपने-अपने हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग और टेकऑफ कराते हैं।
दस हेलीकॉप्टर हो चुके क्रैश
वर्ष 2010 से 2018 तक केदारनाथ क्षेत्र में सात हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुकी हैं, जिसमें सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। इन हादसों में सेना के 20 जवानों सहित 23 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, सात लोग घायल हो गए थे। यही नहीं, लैडिंग और टेकऑफ के दौरान भी केदारनाथ में बीते छह वर्षों में चार हेलीकॉप्टरों का हवा के दबाव के चलते अनियंत्रित होने से संतुलन बिगड़ गया था। गनीमत रही कि इस दौरान किसी भी यात्री को नुकसान नहीं पहुंचा।
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दोएम दर्जे के हेलीकॉप्टर भरते उड़ान
केदारनाथ यात्रा में निजी कंपनियों द्वारा 80 व 90 के दशक में निर्मित सिंगल इंजन वाले हेलीकॉप्टर संचालित किए जाते रहे हैं। इस संबंध में बीते वर्षों में कई यात्री प्रशासन से शिकायतें भी कर चुके हैं।
केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टरों की गुणवत्ता के साथ ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम को लेकर शासन के माध्यम से यूकाडा को पत्र भेजा जा रहा है। सभी हेली कंपनियों को भी अलग से पत्र भेजकर दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
-- मनुज गोयल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग