सोमवार तड़के चार बजकर दस मिनट पर लांखी गांव के पास की पहाड़ी पर बादल फटने से शंकर लाल का मकान मलबे की चपेट में आ गया, जिससे शंकर लाल की बेटियां आरती (आठ वर्ष) व अंजली (छह वर्ष) और उनका रिश्तेदार अजय (24) पुत्र सुरेंद्र लाल, निवासी नौरख, पीपलकोटी मलबे में दब गए।
स्थानीय ग्रामीणों ने बारिश में ही मलबे को हटाना शुरू किया। एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची और सुबह नौ बजे तक तीनों शव मलबे से निकाल दिए गए। इसी दौरान बांजबगड़ गांव में भी एक आवासीय मकान भूस्खलन की चपेट में आ गया।
मकान का एक हिस्सा पूरी तरह मलबे में दबने से अब्बल सिंह की पत्नी रूपा देवी (33) और नौ माह की बेटी चंदा मलबे में दब गईं। ऑली गांव में भी एक आवासीय मकान के पीछे भूस्खलन होने के कारण मलबे में दबने से नौरती (20) पुत्री नैनू राम की मौत हो गई। घटना में 40 मवेशी भी मलबे में दफन हो गए। बांजबगड़ क्षेत्र में बादल फटने से चुफलागाड़ में उफान आ गया।
नदी के कटाव से घाट बाजार में शंभू प्रसाद मैंदोली, कुंवर सिंह, दिनेश प्रसाद और शाहिद की दुकानें बाढ़ में समा गई। चमोली के प्रभारी जिलाधिकारी हंसादत्त पांडे ने कहा कि बांजबगड़ गांव में ही सभी मृतकों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
रुद्रप्रयाग में लगातार हो रही बारिश से सोमवार को मंदाकिनी व अलकनंदा नदी उफान पर रही। अलकनंदा नदी का जलस्तर 623.20 व मंदाकिनी नदी का जलस्तर 622 मीटर रहा। भले ही अभी तक दोनों नदियां खतरे के निशान से लगभग चार मीटर नीचे बह रही हैं, लेकिन प्रशासन ने एतियात के तौर पर नदी किनारे बने आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों को सतर्क रहने को कहा है। साथ ही आपदा प्रबंधन व राजस्व विभाग को जरूरी तैयारी के लिए अलर्ट कर दिया गया है।
रविवार मध्य रात्रि से सोमवार दोपहर तक हुई तेज बारिश के कारण केदारघाटी से ही मंदाकिनी का उफान अपने चरम पर रहा। वहीं, अलकनंदा का वेग भी बीते दिनों की अपेक्षा बहुत अधिक रहा। दोनों नदियों के उफान पर होने से जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में विभिन्न स्थानों पर बने नमामि गंगे के घाट और पुराने विकास भवन के ठीक नीचे नदी किनारे स्थापित भगवान शिव की मूर्ति भी जलमग्न हो चुकी है।
अलकनंदा नदी का जलस्तर कोटेश्वर मंदिर में गुफा तक पहुंचने के चलते सुरक्षा कारणों से जलाभिषेक को पहुंचे लोगों को पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीम ने पहले ही रोक दिया था। केदारघाटी व जनपद चमोली के घाट क्षेत्र में हुई तेज बारिश के चलते दोनों नदियों का जलस्तर में पूरे दिन उतार-चढ़ाव होता रहा।
इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी हरीश चंद्र शर्मा ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से संबंधित सभी विभागों को अलर्ट किया गया है। साथ ही नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। जरूरी हुआ तो सभी परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने अगस्त्यमुनि व तिलवाड़ा में भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
उत्तरकाशी में गंगोत्री धाम के असुरक्षित स्नान घाट पर नहाते समय एक तीर्थयात्री महिला नदी के तेज बहाव में बह गई। मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने भारी मशक्कत कर महिला को सुरक्षित बचा लिया।
गंगोत्री व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतेंद्र सेमवाल ने बताया कि रविवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे पुणे महाराष्ट्र निवासी स्नेहा पत्नी अंकुश राठी गंगोत्री धाम के घाट पर गंगा स्नान करने के लिए नदी में उतरीं। तभी वह अनियंत्रित होकर नदी के तेज बहाव में बह गई। घाट पर तैनात पुलिस उपनिरीक्षक देवेश कुकशाल एवं फायरमैन संजय कुमार ने भारी मशक्कत कर उक्त महिला को कुछ ही दूरी से सुरक्षित निकाल लिया। साथी यात्रियों ने पुलिस कर्मियों के साहस की सराहना करते हुए आभार जताया।
सोमवार सुबह भी गंगोत्री घाट पर स्नान करते समय हावड़ा पश्चिम बंगाल निवासी 73 वर्षीय काशीनाथ मांझी अचानक बेहोश हो गए। घाट पर तैनात पुलिस बल ने तत्काल इस तीर्थयात्री को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाकर उपचार कराया। जिससे उसकी जान बच गई।
बारिश से ग्वालदम, तलवाड़ी, थराली सहित आसपास के क्षेत्रों में बरसाती गदेरे और नाले उफान पर आ गए। इससे सड़कों पर मलबा आ गया। ग्वालदम और चिड़िंगा में लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचा। थराली-देवाल सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश सड़कें बंद हो गई हैं।
गोठिंडा और टुंड्री क्षेत्र में हुई बारिश और भूस्खलन से चेपड़ों गदेरे में सड़क का कुछ हिस्सा बह गया जिससे दिनभर यातायात ठप रहा। ग्रामीणों क्षेत्रों की सड़कों तक जेसीबी नहीं पहुंच पाईं, जिससे सड़क नहीं खुल पाई। कर्णप्रयाग-ग्वालदम-अल्मोड़ा सड़क को दोपहर बाद थराली से ग्वालदम तक खोला जा सका। लोनिवि और पीएमजीएसवाई की जेसीबी चेपड़ों गदेरे को भरने में लगी हैं। लोनिवि के अधिशासी अभियंता जगदीश रावत ने बताया कि जल्द सड़क ठीक कर यातायात बहाल किया जाएगा।
वहीं ग्वालदम से थराली के बीच बहने वाले गदेरे उफान पर आने से चिडंगा, जौला, बुडजौला, त्रिकोट, सेरा, विजयपुर, पंतनगरी, बैनोली आदि गांवों की कृषि भूमि बह गई। ग्वालदम में सुंदरी देवी के मकान को क्षति पहुंची है। वहीं चिड़ंगा के अवतार राम के मकान का एक हिस्सा मलबा आने से क्षतिग्रस्त हो गया। राजस्व उपनिरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि जांच कर नुकसान का जायजा लिया जाएगा।
बज्वाड़ गांव में घरों में घुसा मलबा
थराली क्षेत्र के बज्वाड़ गांव में लोगों के घरों में मलबा आ गया, जिससे ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। जिस समय गांव में मलबा आया, लोग अपने घरों में थे। ग्रामीण धनी राम, देवी प्रसाद, संजय जोशी आदि ने बताया कि निर्माणाधीन कुलसारी-आलकोट मोटर मार्ग का मलबा बज्वाड़ गांव की तरफ डाला गया था, जो बारिश के कारण घरों में घुस गया। किसी तरह लोगों ने आपदा कंट्रोल रूम में फोन कर सूचना दी।
चमोली जिले में भारी बारिश के बाद 29 ग्रामीण संपर्क मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। बिरही-निजमूला मोटर मार्ग गाड़ी गांव के पास करीब पंद्रह मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे घाटी के गाड़ी, सैंजी, निजमूला, हुडंग, मानुरा, तड़ागताल, धारकुमाला, गौंणा, पाणा, ईराणी, झींझी, ब्यारा, दुर्मी, पगना समेत 14 गांव अलग-थलग पड़ गए हैं।
विगत 14 जुलाई को भी यह सड़क करीब सात मीटर तक बह गई थी। लोक निर्माण विभाग ने पुश्ता निर्माण कर 24 जुलाई को यहां छोटे वाहनों की आवाजाही सुचारु कर दी थी। अब फिर सड़क अवरुद्ध होने से ग्रामीणों के सामने आवाजाही का संकट गहरा गया है। चमोली-रांगतोली-लासी-सरतोली, गोपेश्वर-पोखरी, नंदप्रयाग-देवखाल, कलसिर-धोतीधार के साथ ही कई ग्रामीण संपर्क मार्ग मलबा और बोल्डर आने से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे ग्रामीणों को मीलों दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है।
लासी-मजोठी सड़क किनारे नाली का निर्माण नहीं होने से बरसाती पानी और मलबा यहां दुकानों में घुस गया है। ग्रामीण वीरेंद्र सिंह, कमल सिंह, हरेंद्र सिंह, डब्बल सिंह और नयन सिंह का कहना है कि लोनिवि, एडीबी और पीएमजीएसवाई के अधिकारियों से सड़कों को खोलने की मांग उठाई है।
मौसम सामान्य होने पर सड़कों को खोलने का काम शुरू कर दिया जाएगा। लोनिवि, पीएमजीएसवाई के साथ ही अन्य निर्माणदायी संस्थाओं को शीघ्र सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए खोलने के लिए कह दिया गया है।
- नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली
बांजबगड़ में मृतकों के पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों की टीम के समय पर न पहुंचने से लोगों ने हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। थराली विधायक मुन्नी देवी शाह ने प्रभावित क्षेत्र से ही शासन के आला अधिकारियों को फोन कर शीघ्र चमोली में तैनात सीएमओ डा. अनूप कुमार डिमरी को निलंबित करने की मांग उठाई। कुछ समय बाद टीम मौके पर पहुंची और शवों का पोस्टमार्टम किया गया।
सोमवार को लांखी, बांजबगड़ और ऑली गांवों से एसडीआरएफ व आपदा की टीमों ने अपराह्न एक बजे तक शवों को पोस्टमार्टम के लिए बांजबगड़ गांव के पंचायत घर में पहुंचाया, लेकिन अपराह्न डेढ़ बजे तक भी स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी, जिस पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। थराली विधायक मुन्नी देवी शाह ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के न पहुंचने पर मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन किया और शीघ्र चमोली के सीएमओ के निलंबन की मांग उठाई।
प्रभारी जिलाधिकारी हंसादत्त पांडे और अपर जिलाधिकारी मोहन सिंह बर्निया ने विधायक व स्थानीय लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने का आश्वासन दिया। अपराह्न दो बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अपराह्न तीन बजे तक सभी शवों का पोस्टमार्टम कर दिया गया। इधर, सीएमओ डा. अनूप कुमार डिमरी का कहना है कि घटना की सूचना मिलते ही विभागीय टीम प्रभावित क्षेत्र में भेज दी गई थी। दो डॉक्टर सुबह नौ बजे ही बांजबगड़ और लांखी गांव पहुंच गए थे।