शिवालिक की पहाड़ियों पर भारी बारिश के कारण सोमवार सुबह करीब छह बजे अचानक क्षेत्र की मोहंड रो, सूक रो, चिल्लावाली, रायघटी और बामरो समेत करीब आधा दर्जन बरसाती नदियां उफान पर आ गईं। नदियों का बहाव देखकर सुबह बाहर निकले ग्रामीणों में खलबली मच गई।
बताया जा रहा है कि इस दौरान रायघटी नदी इतनी उफान पर थी कि उसके बहाव से बिहारीगढ़-रोशनाबाद मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया और नदी का पानी कुड़कावाला गांव की ओर जाने लगा। इससे ग्रामीण दहशत में आए गए। नदी का पानी घुसने से ग्रामीणों की करीब एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई हालांकि पानी गांव तक नहीं पहुंचा। पानी और बढ़ा तो रायघटी के तेज बहाव ने बिहारीगढ़-रोशनाबाद मार्ग को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। सूचना पाकर तत्काल बुग्गावाला पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने खतरे को देखते हुए राहगीरों को पानी पार कर आगे नहीं जाने दिया। इस दौरान तीन घंटे तक बिहारीगढ़ और रोशनाबाद का संपर्क कटा रहा। करीब नौ बजे नदियों का पानी उतरना शुरू हुआ तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
कुड़कावाला के प्रधान के पति विजयपाल का आरोप है कि ब्लॉक स्तर से लेकर जिला और मुख्यमंत्री तक से शिकायत की गई है कि नदी के उफनाने पर कभी भी खतरा हो सकता है। लिहाजा बाढ़ सुरक्षा के कार्य या तटबंध बनाकर गांव को नदी के पानी से सुरक्षित किया जाए, लेकिन ग्रामीणों की पीड़ा किसी ने भी नहीं सुनी।
पिछले दो वर्षों से रायघटी नदी का रुख गांव की ओर है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार तो पानी गांव में घुस जाता है। उधर, एसडीएम भगवानपुर संतोष कुमार पांडेय का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। अगर ऐसा है तो उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ग्रामीणों की समस्या दूर कराई जाएगी।
खानपुर और आसपास के क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बना हुआ है। इससे ग्रामीणों की चिंताएं कुछ कम हो गईं है। सोमवार को नदी का जलस्तर 292.2 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी रेखा (293 मीटर) से करीब एक मीटर कम है। वहीं, खतरे का निशान 294 मीटर है।
हालांकि, मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए बारिश होने पर अब भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। एसडीएम लक्सर पूरण सिंह राणा का कहना है कि क्षेत्र की चारों बाढ़ राहत चौकियों पर कर्मचारियों को 24 घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।