बुधवार की सुबह देहरादून और हरिद्वार के साथ उत्तराखंड के कई इलाकों में बारिश जारी है।
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भारी बारिश के चलते फिलहाल केदारनाथ यात्रा रोक दी गई है। इसके साथ ही बदरीनाथ हाईवे भी बंद है। बीआरओ हाईवे को साफ करने में जुट गया है।
केदारघाटी के जिलाधिकारी ने जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह अवकाश 16 से 18 जुलाई तक रहेगा।
जिले में हो रही भारी बारिश के कारण जिलाधिकारी ने यह घोषणा बुधवार की सुबह की। जिसके बाद स्कूलों को बंद कर दिया गया।
इस साथ ही केदारनाथ हाईवे लगातार तीसरे दिन मंगलवार को भी जगह-जगह अवरुद्ध रहा। देर शाम हाईवे छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया था।
हाईवे पर ‘हाई रिस्क’
केदारनाथ और बदरीनाथ हाईवे पर जगह-जगह भूस्खलन होने से वे आवागमन की दृष्टि से हाईरिस्की हो गए हैं।
एक तरफ नदी और दूसरी ओर पहाड़ी से होते भूस्खलन से केदारनाथ हाईवे पर विजयनगर-पुराना देवल में मार्ग संवेदनशील बना हुआ है।
पिछले वर्ष की आपदा से केदारनाथ हाईवे कई स्थानों पर ध्वस्त हो गया था। विजयनगर में करीब 700 मीटर सड़क मंदाकिनी नदी में समा गई थी।
यहां लोनिवि ने राजमार्ग पर पत्थर-मिट्टी का भरान कर डामरीकरण कर दिया था, लेकिन इसी सोमवार को यहां पर करीब 20 मीटर सड़क फिर ध्वस्त होने से वाहनों की आवाजाही बंद है।
यहां पर हैं डेंजर जोन
यह स्थान पैदल चलने वालों के लिए खतरनाक बना हुआ है। पहाड़ी से मलबा गिर रहा है। पिछले वर्ष भी यहां पर मलबा गिरने से एक स्कूली छात्रा की मौत हो गई थी।
कांग्रेस नेता और स्थानीय निवासी कुंवर लाल बताते हैं कि यहां पर सड़क जीआईसी अगस्त्यमुनि से अगस्त्यमुनि-विजयनगर के पीछे-पीछे बनियाड़ी होते हुए बनाई जानी चाहिए।
बदरीनाथ हाईवे पर बांसवाड़ा से आधा किमी आगे का पैच दोबारा से सिरदर्द बन गया है। तीन साल पहले भी इस पैच ने काफी परेशान किया था। इन दिनों यहां पर बार-बार मलबा आने से यातायात बाधित हो रहा है।
यातायात के मामले में जिले में नौबत लगभग पिछले साल वाली आ पहुंची है। केदारनाथ हाईवे जगह-जगह धंस रहा है।
बदरीनाथ हाईवे पर भी सिरोहबगड़ में लगातार पत्थर गिर रहे हैं। स्थिति यह है कि एक जगह पर मार्ग खुलता है, तो दूसरी जगह बंद हो जाता है। अगले दो-तीन दिन लगातार बारिश रहने से स्थिति और बिगड़ सकती हैं।
मकान भी खतरे की जद में तिलवाड़ा में रामपुर पुल के निकट केदारनाथ हाईवे धंस रहा है। यहां हाल में पुश्ता बनाया गया था। यहां पर सड़क के दूसरी ओर दो आवासीय मकान भी खतरे की जद में हैं।
मकान मालिक दिनेश और गोपाल लाल ने बताया कि पिछले वर्ष पुश्ता ध्वस्त होने पर बीआरओ ने आश्वासन दिया था कि उनकी भूमि का अधिग्रहण कर मुआवजा देकर सड़क काटी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।