मार्च के आखिरी दिनों में जब गर्मी उत्तराखंड के लोगों को सताने लगी थी, तभी मौसम ने एक बार फिर मिजाज बदला लिया।
पूरे प्रदेश में रविवार को सुबह से रात तक रुक-रुककर कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होती रही। बदरीनाथ, केदारनाथ और यमुनोत्री-गंगोत्री की चोटियों समेत ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई।
नाचनी (पिथौरागढ़) में तेज बारिश से हरड़िया के पास थल-मुनस्यारी मार्ग का 50 मीटर हिस्सा बह गया। बारिश के दौरान बिजली गिरने से गरुड़ (बागेश्वर) के बूंगा में 32 वर्षीय युवक की मौत हो गई।
पौड़ी के उतारासू गांव में भी एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रदेश भर में गरज-बरस का दौर अभी कायम रहने के आसार हैं। वैसे, इस मार्च में देश के उत्तरी और मध्य क्षेत्र में हुई बारिश ने पिछले 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक एलएस राठौड़ ने बताया कि इस साल मार्च में 1915 के बाद सबसे अधिक बारिश हुई है। राज्य मौसम केंद्र के निदेशक आनंद शर्मा के मुताबिक 1967 में इस क्षेत्र में मौसम का ऐसा रुख देखने को मिला था। मालूम हो कि इस बार मार्च में मौसम का मिजाज अक्सर बदलता रहा। बीच-बीच में बारिश-बर्फबारी होती रही।
रविवार को बारिश-बर्फबारी से तापमान में अच्छी-खासी गिरावट आई है। दून के तापमान में लगभग छह डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। रविवार को दिन का तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस रहा। पहाड़ में कई जगह ठंड लौट सी आई है।
केदारघाटी में सुबह साढ़े नौ बजे घने काले बादल घिर आने से अंधेरा सा छा गया। मौसम के इस डरावने अंदाज से लोगों के कदम जहां-तहां ठिठक गए। घरों में दरवाजे और खिड़कियां बंद कर ली गईं।