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तलहटी में भी बिखरी चांदी, सभी झूमे

Sun, 19 Jan 2014 02:44 PM IST
अमर उजाला, विकासनगर/चकराता/त्यूनी
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जौनसार बावर की ऊंची पहाड़ियों के साथ ही तलहटी पर बसे गांव भी बर्फ से लकदक हो गए हैं। शुक्रवार रात 11 से शनिवार शाम 4 बजे तक क्षेत्र में भारी बारिश होती रही। चकराता छावनी बाजार कड़ाके की ठंड की चपेट में है।
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2 से 8 फीट तक बर्फ
यहां पर शनिवार सुबह 7 बजे से शाम 3.30 बजे तक लगातार 8 घंटे हिमपात जारी रहा। क्षेत्र में 2 फीट तक बर्फ गिर चुकी है। सर्दी से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। लोगों को अलाव का सहारा लेना पड़ा।

वहीं लोहारी, लोखंडी, कोटीकनासर की ऊंची पहाड़ियों पर 6 से 7 फीट तक बर्फबारी हुई है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। पछवादून में भी तापमान गिरने से ठंड बढ़ गई है।
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पहाड़ियां बनी आकर्षण का केंद्र
जनजातीय क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों मुंडाली, खड़ंबा, देववन, देवती, बुधेर, मोल्टा, चांगशील, खादरा, बोगीधार आदि ने बर्फ की चादर ओढ़ ली है। दूर से ही बर्फबारी से लकदक पहाड़ियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

नागथात क्षेत्र में भी भारी बर्फबारी हुई। बर्फबारी के चलते ऊंचाई वाले इलाकों में खूब सैलानी पहुंच रहे हैं। शनिवार को चकराता का न्यूनतम तापमान -03 डिग्री रिकार्ड किया गया। विकासनगर का न्यूनतम तापमान 04 डिग्री रिकार्ड किया गया।

32 साल बाद गिरी बर्फ
बर्फबारी पूरे प्रदेश में कई रिकार्ड तोड़ रही है। ग्लोबल वार्मिंग के बीच इतने साल बाद हुई बर्फबारी को लोग शुभ संकेत से जोड़कर देख रहे हैं।

कालसी ब्लाक के अलसी, नेवी, किमोटा, कोठा तारली, रानीगांव, सैंज, कोफ्टी, भुग्ताड़ समेत एक दर्जन गांव ऐसे हैं जहां पर करीब 32 साल बाद बर्फबारी हुई है। यहां पर करीब पांच इंच तक बर्फ गिरी है।

दो फीट गिरी बर्फ
अलसी के 65 वर्षीय सिंगाराम बिष्ट और मलेथा के 75 वर्षीय गुमान सिंह का कहना है कि करीब 32 साल पहले गांव में आखिरी बार बर्फ देखी थी। इसके बाद आज ही गांव में बर्फ पड़ती देख रहे हैं। इन गांवों में एक से दो फीट बर्फ पड़ी है।

युवाओं में भी पहली बार बर्फ देख उत्साह बना हुआ हैं। महेंद्र सिंह बिष्ट, रण सिंह राठौर आदि का कहना है कि बुजुर्गों से ही सुना था कि गांव में बर्फ पड़ा करती थी। आज पहली बार बर्फ पड़ते देख रहे हैं।

1981 में साहिया तक गिरी थी बर्फ
इस साल जहां कई गांवों में 32 साल बाद बर्फ पड़ी है। वहीं 1981 में साहिया तक बर्फ पड़ा करती थी। बुजुर्गों का कहना है कि 1981 में साहिया में 6 इंच तक बर्फ पड़ी थी।

बुजुर्ग सूरत सिंह चौहान का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही मौसम ने करवट बदलना शुरू कर दिया है। वरना पहले सर्दियों में साहिया तक पूरा इलाका बर्फ से ढक जाता था।

बारिश, हिमपात से मुश्किलें बढ़ीं
भारी बारिश और हिमपात से पछवादून और जौनसार बावर में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जौनसार बावर के दो दर्जन से अधिक मोटर मार्ग भारी बारिश और बर्फवारी के कारण बंद पड़े हैं।

जौनसार बावर की लाइफ लाइन कहे जाने वाला चकराता-कालसी मोटर मार्ग सुबह 11.30 से शाम 4.30 बजे तक पांच घंटे बाधित रहा। इस दौरान मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लगी रही।

संपर्क कटा
पीडब्ल्यूडी ने जेसीबी लगाकर मार्ग पर यातायात बहाल कराया। मार्ग बंद होने से तीन दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क देहरादून से कटा रहा। लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं अन्य छोटे मार्गों के बाधित होने से करीब 40 से अधिक गांवों का संपर्क जिला और तहसील मुख्यालय से कट गया है।

ये मार्ग हुए बंद
बर्फबारी के कारण जहां त्यूनी-चकराता, लोखंडी-पिपारा, त्यूनी-कथियान, भूट-फनार, डेरनाड़-पुरटाड़ मोटर मार्ग बंद पड़े हैं। वहीं भारी बारिश के कारण मलबा आने से पजिटिलानी-खमरोली, साहिया-क्वानू-हाजा, पजिटिलानी-भंजरा, मुंशीघाटी-देऊ, पाटाबैंड-माख्टी, चकराता-मसूरी, माख्टी-अछेड़पुल, साहिया-पानुवा, कालसी-बैराटखाई मोटर मार्ग बंद हो गए हैं।

सेब उत्पादकों के चेहरे खिले
पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर हिमपात से सेब उत्पादकों के चेहरे खिल गए हैं। इससे सेब के उत्पादन में तीस से चालीस प्रतिशत तक इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बर्फबारी होने से फूल से फल बनने की प्रक्रिया में तेजी आती है।

त्यूनी क्षेत्र अंतर्गत 700-750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सेब का उत्पादन किया जाता है, जिसमें रेड, गोल्डन रॉयल और स्पर्श प्रजाति की चीफ रेड वैरायटी प्रमुख है। यहां के सेब की दिल्ली, सहारनपुर, कानपुर, मेरठ, आगरा, लखनऊ में भारी डिमांड है।

इनका है कहना
बागवान शामानंद नौटियाल, प्रदीप कुमार, जगत सिंह आदि का कहना है कि मौसम बागवानों पर मेहरबान है। बर्फबारी से जमीन में नमी बनी रहेगी, जिससे फूल बनने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

दिसंबर के बाद जनवरी माह में बर्फबारी होने से इस वर्ष सेब की अच्छी पैदावार होने की संभावना है। बारिश और बर्फबारी होने से सेब के पौधों को पर्याप्त नमी और पोषक तत्व मिल सकेंगे, जिससे उत्पादन भी बढ़िया होगा।
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-हरीश चंद बर्तवाल, उद्यान प्रभारी चौसाल
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