फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देहरादूनः तीन मकान मलबे में दफन, 7 की मौत

Sun, 17 Aug 2014 02:04 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
चौबीस घंटे की मूसलाधार बारिश राजधानी दून में भारी तबाही लेकर आई। शुक्रवार देर रात करीब दो बजे काठबंगला में पहाड़ी से मलबा गिरने से तीन मकान धराशायी हो गए।
विज्ञापन


अंदर सो रहे सात लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक महिला को छह घंटे के प्रयासों के बाद जीवित निकाला जा सका। हालांकि उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं।

राजपुर थाना क्षेत्र में काठबंगला में सांई मंदिर के पीछे पहाड़ी से सटी जमीन पर तीन मकान बने हुए थे। सबसे ऊपर पिथौरागढ़ निवासी आईसक्रीम विक्रेता बहादुर चनियाल (54) पत्नी चंदकला(52), बेटी सोनिया (22), शिल्पी (20) और बेटे शुभम (17) के साथ सोए हुए थे।
विज्ञापन


इससे नीचे एक मकान में मुरादाबाद निवासी लक्ष्मेन्द्र (32) और दूसरे में नेपाली महिला खेमा देवी (65) पोती खुशी गुरुंग (7) के साथ सो रही थीं। शुक्रवार देर रात करीब दो बजे पहाड़ी से गिरे मलबे ने बहादुर चनियाल के बाद खेमा देवी के मकान को ध्वस्त कर दिया।

छह घंटे बाद जिंदा बची एक महिला

लक्ष्मेन्द्र के मकान का भी एक कमरा मलबे की चपेट में आ गया। वह इसी कमरे में सो रहे थे। करीब सवा दो बजे 100 नंबर पर इस कहर की सूचना मिली तो ट्रैफिक इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह रावत के साथ राजपुर एसओ राजेश शाह एसडीआरएफ की टीम को लेकर मौके पर पहुंच गए लेकिन, अंधेरे और बारिश के बीच आपरेशन चलाने में काफी दिक्कत हुई।

करीब छह घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद चंदकला को मलबे से जीवित निकाल लिया गया, लेकिन बाकी किसी को नहीं बचाया जा सका।

रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बहादुर चनियाल, सोनिया, शिल्पी, शुभम, लक्ष्मेन्द्र, खेमा देवी और खुशी गुरुंग का शव मलबे से निकाला।

एडीजी कानून व्यवस्था राम सिंह मीणा, एसडीआरएफ की पी रेणुका देवी, डीएम और एसएसपी इस दौरान मौके पर मौजूद रहे।

बाल-बाल बचे बाप-बेटा

जहां घर पर आए मलबे में दबकर लक्ष्मेंद्र की मौत हो गई वहीं उसी घर में सो रहे लक्ष्मेन्द्र के पिता बिशंबर और भाई बाल-बाल बच गए। लक्ष्मेन्द्र के साथ यह दोनों भी बराबर के कमरे में सोए हुए थे।

कुदरत का करम रहा कि उनका कमरा मलबे के नीचे आने से बच गया।

दोनों ने बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। लक्ष्मेन्द्र की मौत के बाद उनका रोते-रोते बुरा हाल था। खेमा देवी का बेटा मसूरी में काम करता है। सूचना मिलते ही वह भी यहां पहुंच गया था।
विज्ञापन

स्थिति देर रात तक गंभीर

काठबंगला में मौत का शिकार हुई दोनों बहनों को खतरे का आभास हो गया था। उन्होंने देर रात अपनी सहेली को फोन कर लगातार बिगड़ रही स्थिति की जानकारी दी थी।

दून अस्पताल की मार्च्यूरी के बाहर सुबकते हुए ममता ने बताया कि डीएवी में बीकाम द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाली दोनों बहनें सोनिया और शिल्पी उसकी सहेली थीं। रात दस बजे दोनों ने ममता को फोन किया था।

उन्होंने बताया था कि उनके घर के आसपास काफी मिट्टी खिसक रही है। इस पर ममता ने कहा था कि वे वहां से निकलकर आ जाएं। सुबह ममता को सहेलियों की मौत का पता लगा। अस्पताल पहुंची तो पता चला कि सहेलियों की मां चंदकला आईसीयू में भर्ती है।

डाक्टरों ने बताया कि चंदकला देवी की कमर की हड्डी टूटी है और पैरों में भी फ्रैक्चर है। काठबंगला निवासी संजय ने बताया कि छह साल की बच्ची खुशी गुरुंग स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी पर मालसी से अपनी दादी खेमा देवी के घर गई थीं। हादसे में दादी और पोती दोनों की मौत हो गई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें