एडिशनल सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।
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नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष पर लगाए आरोप को लेकर केंद्र की जमकर खिंचाई की। केंद्र की तरफ से दावा किया गया था कि भाजपा विधायक भीम लाल आर्य को अयोग्य करार दिए जाने की शिकायत को स्पीकर ने लटकाए रखा, जबकि हकीकत में भीम लाल के खिलाफ शिकायत राष्ट्रपति शासन लागू करने के बाद की गई थी।
कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद शिकायत 5 अप्रैल को क्यों दी गई। हम सोच रहे थे कि स्पीकर ने दोहरे मापदंड क्यों अपनाए (कि कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को निलंबित कर दिया, लेकिन भीम लाल पर फैसले को लंबित रखा। यह बहुत खतरनाक है। आप स्पीकर पर खतरनाक आरोप लगा रहे हैं।
क्या भारत की सरकार इस तरह काम करती है। आपको इस बारे में क्या कहना है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि राष्ट्रपति ने इसे (स्पीकर के आचरण को) भी राष्ट्रपति शासन की मंजूरी के लिए आधार माना है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बृहस्पतिवार को इस मामले में केंद्र की ओर से अदालत में सफाई पेश करेंगे।