नैनीताल हाईकोर्ट ने कॉर्बेट नेशनल पार्क में हो रहे अवैध निर्माण व पेड़ों के कटान के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
देहरादून निवासी अनु पंत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कोर्ट ने एक वर्ष पूर्व पेड़ों के अवैध कटान के बारे में मुख्य सचिव को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि अभी तक छह हजार पेड़ काटे जा चुके हैं और पांच जांचें हो चुकी हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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याचिका में कहा गया कि मुख्य सचिव ने अपने शपथपत्र में कहा था कि वे समय-समय पर न्यायालय को कार्यवाही के बारे में अवगत कराते रहेंगे, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद उनकी ओर से किसी भी तथ्य से कोर्ट को अवगत नहीं कराया गया। कोर्ट ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का एक भी वृक्ष नहीं काटा जा सकता लेकिन वर्तमान में फॉरेस्ट सर्वे के अनुसार 6000 से ज्यादा पेड़ काट दिए गए हैं, जो देवभूमि उत्तराखंड के लिए एक काला धब्बा है। विभागाध्यक्ष की ओर से गठित जोशी कमेटी के अनुसार कई अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है लेकिन इन शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।