दिल्ली पर निर्भरता हो जाएगी खत्म
वर्तमान में किसी भी गंभीर वायरस या अज्ञात बीमारी के नमूनों की हाई-टेक जीनोम सीक्वेंसिंग और जांच के लिए दिल्ली या पुणे स्थित प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ता है। इसकी जांच रिपोर्ट आने में थोड़ा समय भी लगता है। हरिद्वार में आधुनिक बीएसएल (बायो-सेफ्टी लेवल) लैब स्थापित होने से घंटों के भीतर सटीक जांच परिणाम मिल सकेंगे।
जानवरों से फैलने वाले रोगों पर भी होगा शोध
उत्तराखंड का बड़ा भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिससे जानवरों से इंसानों में फैलने वाले रोगों (स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस, रेबीज आदि) का जोखिम रहता है। एनसीडीसी की टीम स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों पर विशेष शोध कर सकेगी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हरिद्वार के परिसर में ही यह केंद्र होने से स्थानीय मेडिकल छात्रों, शोधकर्ताओं और डॉक्टरों को महामारी विज्ञान, वायरोलॉजी और पब्लिक हेल्थ सर्विलांस में आधुनिक अनुसंधान और प्रशिक्षण का सीधा लाभ मिलेगा।