आपदाओं से घिरे उत्तराखंड के चमोली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है या यूं कहें कि राम भरोसे ही हैं।
बात करें जिला अस्पताल की तो यहां चिकित्सकों के 27 पदों के सापेक्ष मात्र 15 चिकित्सकों की तैनाती की गई है, जबकि चिकित्सालय के समीप ही स्थापित ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों के स्वीकृत 11 पदों के सापेक्ष एक भी चिकित्सक तैनात नहीं किया गया है।
यही स्थिति जिले के अन्य अस्पतालों की भी है। ऐसे में सरकारों के बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
फाइलों में रह गई ट्रांसफर योजना
चारधाम यात्रा शुभारंभ से पूर्व शासन की ओर से हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर चिकित्सकों की स्थानांतरण नीति बनाने की योजना बनाई गई, लेकिन आज तक योजना परवान नहीं चढ़ पाई।
इसका खामियाजा आपदा, दुर्घटना और गंभीर बीमारी के समय स्थानीय लोगों को उठाना पड़ता है। नगर पालिका सभासद नवल भट्ट, अंकोला पुरोहित और हरीश तिवारी का कहना है कि सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के प्रति संजीदा नहीं है।
यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों के भवनों का निर्माण तो कर दिया जाता है, लेकिन चिकित्सक न होने पर लोगों को भटकना पड़ता है।