आपदा को बीते भले ही पांच माह बीत गए, लेकिन उसके परिणाम अभी भी देखने को मिल रहे हैं। आपदा के दौरान टिहरी बांध की झील में बहकर आया कूड़ा-कचरा लोगों के लिए मुसीबत बन गया है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव
झील का जलस्तर कम होने के बाद किनारे जमा कचरे से उठ रही दुर्गंध से चिन्यालीसौड़ और आसपास के तटवर्ती गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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जून माह में उफान पर आई भागीरथी में भारी मात्रा में बहकर आया कूड़ा-कचरा, लकड़ी और पशुओं के शव टिहरी बांध की झील में जमा हो गए थे।
झील में जमा लगभग 30 ट्रक लकड़ी तो वन विकास निगम निकाल ली, लेकिन पांच माह से अधिक समय बीतने पर भी कूडा-कचरा नहीं हटाया गया।
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अब जलस्तर कम होने पर यह कूड़ा-कचरा झील के किनारे जमा हो गया है। कचरे से उठ रही दुर्गंध से चिन्यालीसौड़ के साथ ही झील से सटे तुल्याड़ा, गैलाड़ी, देवीसौड़, सुनारगांव, छोटी नागणी के बाशिंदों का जीना दूभर हो रखा है।
लोगों ने टीएचडीसी से शीघ्र कूड़े-कचरे को हटाने की मांग की है।
बीमारी फैलने का अंदेशा
झील में जमा कचरे से नगर के साथ ही आसपास के ग्रामीण इलाकों में बीमारियां फैलने का अंदेशा बना हुआ है। यदि शीघ्र कूड़े का निस्तारण नहीं किया गया तो टीएचडीसी के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
- शूरवीर सिंह रांगड़, अध्यक्ष नगर पंचायत चिन्यालीसौड़
पूर्व में टीएचडीसी की ओर से नगर पंचायत के माध्यम से कचरा हटवाया गया। झील में जमा शेष कचरे को भी टीएचडीसी को निर्देशित कर नगर पंचायत के माध्यम से हटवाया जाएगा।
- विजयनाथ शुक्ल, एसडीएम चिन्यालीसौड़