अगर फैसले पर सही तरीके से अमल हुआ तो पहाड़ के अस्पताल अपनी चाल बदलेंगे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में सोमवार देर शाम मंत्रिमंडल की हुई बैठक में पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने पर विशेष जोर दिया गया।
पहाड़ों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मोड) में स्वास्थ्य सेवा के खराब प्रदर्शन को देखते हुए इसे वहां से बाहर ही रखने का अहम फैसला किया गया है।
इसके अलावा कैबिनेट में आपदा में अनाथ हुए बच्चों के फंड आदि पर फैसला लिया गया। बैठक में सुरेंद्र राकेश को छोड़कर अन्य सभी मंत्री मौजूद रहे।
मंत्रिमंडल ने 2013 की आपदा में प्रभावित अनाथ बच्चों की मदद के लिए गठित पांच करोड़ रुपये के रिवाल्विंग फंड को मंजूरी दे दी है। इस फंड की मदद से आपदा प्रभावित सभी जिलों में अनाथ बच्चों की मदद की जाएगी। मंत्रिमंडल में लिए गए फैसलों की जानकारी मुख्य सचिव नागराजन रविशंकर ने दी।
उत्तराखंड में 197 करोड़ की योजनाएं प्रस्तावित
मंत्रिमंडल ने विश्व बैंक की सहायता से चलने वाली स्वास्थ्य योजनाओं को मैदान और पर्वतीय जिलों में अलग-अलग तरह से चलाने का फैसला लिया है।
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में विश्व बैंक की करीब 197 करोड़ की योजनाएं प्रस्तावित हैं। जिसका उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य अवस्थापना सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
उनका कहना है कि मैदानी जिलों में पब्लिक प्राइवेट पाटर्नर (पीपीपी) से चलने वाली योजनाएं बेहतर ढंग से चल रही हैं। जबकि पर्वतीय जिलों में इसके बेहतर परिणाम नहीं आ रहे हैं।
लिहाजा मंत्रिमंडल ने पर्वतीय जिलों में योजना को मूर्त रूप देने केलिए सोच समझकर अन्य तरह से चलाने का फैसला लिया है। पर्वतीय जिलों में इसे आगे बढ़ाने के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी।
मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना पर भी मुहर लगा दी है। पहली अप्रैल से शुरू हो रही इस योजना में पचास हजार रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। परिवार में प्रत्येक सदस्य इसका लाभ ले सकेगा और इसका प्रीमियम सरकार की ओर से दिया जाएगा।
प्रदेश में रहने वाले केंद्र सरकार या राज्य सरकार के कर्मचारियों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं आयकर देने वाले भी इस योजना की परिधि में नहीं आएंगे। सीएस का कहना है कि इस योजना का लाभ उन लोगों तक पहुंचाना है जिन्हें गरीबी केकारण इलाज कराने में दिक्कतें आती हैं।
गैरसैंण विनियमित क्षेत्र घोषित, 13 और गांव जोड़े
मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण फैसले के तहत गैरसैंण को पूरी तरह विनियमित क्षेत्र घोषित कर दिया है। अभी तक यह क्षेत्र नगर पंचायत के अंतर्गत था। विनियमित क्षेत्र में आसपास के 13 गांवों को भी जोड़ दिया गया है।
सीएस ने बताया कि गैरसैंण में विधानसभा और अन्य सरकारी भवन बन रहे हैं। विनियमित क्षेत्र घोषित होने से आसपास क्षेत्र में भी विकास हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पूर्व में गैरसैंण विकास प्राधिकरण का गठन किया था।
सेवा आयोग और ग्राम नियोजन विभाग का ढांचा मजबूत
मंत्रिमंडल ने हाल ही गठित उत्तराखंड सेवा अधिकार आयोग का नया ढांचा तैयार करने के लिए 33 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। इसमें सचिव और संयुक्त सचिवों के साथ अन्य पद शामिल हैं।
वहीं आवास विभाग के तहत नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के पुराने ढांचे का पुनर्गठन किया गया है। पुराने ढांचे के तहत विभाग में 105 अधिकारी व कर्मचारी थे।
अब 25 नये पदों के सृजन को मंजूरी मिलने के बाद विभाग में कुल पदों की संख्या 130 हो जाएगी। इसमें मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, मुख्य योजनाकार और वरिष्ठ नियोजक का नया पद सृजित हुआ है। अब दो वरिष्ठ नियोजक हो जाएंगे।