हरियाणा के पेट्रोल पंप मालिक उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में बडे़ पैमाने पर डीजल की सप्लाई कर सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे हैं। यह खेल फार्म-16 की आड़ में चल रहा है। जबकि दूसरे प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों का विक्रय गैरकानूनी है।
इस मामले को उत्तराखंड पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन ने उजागर किया है लेकिन शासन-प्रशासन फिर भी हरकत में नहीं आया है। वैट चोरी का यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
वैट में अंतर
उत्तराखंड और हरियाणा के वैट में अंतर का फायदा हरियाणा के पेट्रोल पंप मालिक उठा रहे हैं। उत्तराखंड में डीजल पर 21 प्रतिशत वैट वसूला जा रहा है, जबकि हरियाणा में यह 12.50 प्रतिशत है। वैट लगाने के बाद हरियाणा में डीजल की कीमत प्रति लीटर 49.60 रुपये है, जबकि उत्तराखंड में इसकी कीमत 54.91 रुपये है
फायदा ही फायदा
प्रति लीटर 5.31 रुपये का फायदा होने से रदोर (हरियाणा) इलाके के पेट्रोल पंप स्वामी बडे़ पैमाने पर डीजल लाकर राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों सेलाकुई, फार्मा सिटी और सिडकुल क्षेत्र हरिद्वार में सप्लाई कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्रतिदिन करीब 40 से 50 हजार लीटर डीजल उत्तराखंड के उद्योगों में पहुंच रहा है।
हरियाणा के पेट्रोल पंप मालिकों ने राज्य की औद्योगिक इकाइयों में गहरी पैठ बनाई हुई है। डीजल का आर्डर मिलते ही उनके टैंकर यहां के लिए रवाना हो जाते हैं। ऐसी हालत में वहां के डीजल की सेल तो बढ़ जाती है, लेकिन उत्तराखंड के पंपों की सेल पर बुरा असर पड़ता है।
इनकी सुनिए
प्रदेश में हरियाणा के डीजल की सप्लाई होने से राज्य के पेेट्रोेल पंपों की सेल में गिरावट आ रही है। पूरे प्रकरण की जानकारी वित्तमंत्री को दी गई है। उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
-अमरजीत सेठी, जरनल सेक्रेट्री उत्तराखंड पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बारे में हरियाणा के वाणिज्य कर कमिश्नर को पत्र लिखा गया है। औद्योगिक इकाइयों को दूसरे प्रदेश का डीजल इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है। फ्री-ट्रेड होने के कारण फार्म-16 के जरिए कोई भी वस्तु दूसरे प्रदेश से आयातित की जा सकती है।
-एसएस तिरवा, डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर
बैरियर पार करने का जरिया है फार्म-16
हरियाणा के पेट्रोल पंप मालिक वाणिज्य कर विभाग द्वारा जारी प्रपत्र संख्या-16 (आयात घोषणा पत्र) को भरने के बाद अपने टैंकरों को रवाना करते हैं। उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने पर टैंकरों के चालक वाणिज्य कर विभाग के बैरियर पर अधिकारियों को फार्म-16 दिखाते हैं। जिसके बाद उन्हें प्रवेश करने दिया जाता है।