पछवादून के विकासनगर व सेलाकुई में हरतालिका तीज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने घर के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। नेपाली गीतों पर नृत्य करके पर्व की खुशियों को साझा किया।
विकासनगर के तेलपुर में हरतालिका तीज का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत माता पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन के प्रतीक के रूप में माना जाता है। अविवाहित कन्याएं भी इस व्रत को रखती है जिससे उन्हें सुयोग्य वर मिलने का आशीर्वाद मिले।
सुहागिन महिलाएं सुखी दाम्पत्य जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को यह व्रत रखा जाता है। निर्जल निराहार रहकर इस व्रत को रखने का विधान है। इसी क्रम में गोर्खाली सुहागिन महिलाओं ने घर के मंदिर में शिव परिवार की फोटो रखकर बालू का शिवलिंग बनाया जिसमें गिनती के 108 बेलपत्र, 108 दूर्वा सुहागपुड़ा, ऋतुफल, फूल चढ़ाकर मंदिर स्थापित किया गया।
दिनभर उपवास के पश्चात रात को भजन कीर्तन किया। इसके पश्चात महिलाओं ने पारंपरिक गीतों पर नृत्य कर रतजगा किया। बुधवार सुबह बालू के स्थापित शिवलिंग को नदी में विसर्जित किया जाएगा। इस अवसर पर गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष जोगेंद्र शाह, ऋतिका, सोनी गुरूंग, इंद्रा देवी, निशा देवी तमांग, लक्ष्मी थापा, शालिनी थापा आदि उपस्थित रहे।
उधर सेलाकुई में गोर्खाली समुदाय की महिलाओं ने उल्लास के साथ हरतालिका तीज का पर्व मनाया। महिलाओं ने घर-घर में सामूहिक रूप से बैठकर व्रत कथा का श्रवण किया और विधिविधान से हवन-पूजन किया। इस मौके पर पूजा, शगुन श्रीवास्तव, रंजू, मधु, सरिता, स्वीटी आदि मौजूद रहे।