बलिदानी मेजर दुर्गा मल्ल के 81वे बलिदान दिवस पर गोर्खाली सुधार सभा ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। सभा के पदाधिकारियों ने उनके जीवन और बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अध्यक्ष जोगेंद्र शाह ने कहा कि मात्र 18 वर्ष की आयु में दुर्गा मल्ल 2/1 गोरखा राइफल्स में भर्ती हो गए थे। वर्ष 1942 में आजाद हिंद फौज का गठन हुआ, जिसमें दुर्गा मल्ल ने सराहनीय भूमिका निभाई। 27 मार्च 1944 को महत्वपूर्ण सूचनाएं एकत्र करते समय शत्रु सेना ने मणिपुर के कोहिमा के पास उखरूल में उन्हें पकड़ लिया।
15 अगस्त 1944 को उन्हें लाल किले के सेंट्रल जेल लाया गया और दस दिन बाद 25 अगस्त 1944 को उन्हें फांसी दे दी गई। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इस अमर बलिदानी को हमेशा याद किया जाएगा। श्रद्धांजलि सभा में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करके उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस दौरान उत्तराखंड जल विद्युत निगम के पूर्व महाप्रबंधक मेघ बहादुर थापा व कांग्रेस नेता गोदावरी थापली ने दुर्गा मल्ल का चित्र जोगेंद्र शाह को भेंट किया। सभा में केंद्रीय अध्यक्ष पदम सिंह थापा, मधुसूदन उपाध्याय, यम बहादुर थापा उपस्थित रहे।