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बखेड़ा न खड़ा करने की शर्त पर हरीश को हरी झंडी

Mon, 30 Sep 2013 11:46 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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केंद्रीय मंत्री हरीश रावत की पैदल केदारनाथ जाने की इच्छा पूरी होती नजर आ रही है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने उनकी यात्रा को हरी झंडी दिखाने का मन बना लिया है।
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कोई बखेड़ा न बने, इसके मद्देनजर शासन और प्रशासन ने रावत की यात्रा को हां कहना ही सुरक्षित समझा है। केंद्रीय मंत्री की ओर से शासन को लिखी चिट्ठी जिला अधिकारी रुद्रप्रयाग को पहुंच चुकी है। सूत्रों की मानें तो जिला प्रशासन ने उन्हें यात्रा करने की अनुमति देने का मन बना लिया है।

पढ़ें, केदारनाथः मार्ग दुरुस्त नहीं कैसे शुरू होगी यात्रा

लोनिवि के अधिशासी अभियंता ने खच्चर से रविवार को गौरीकुंड से केदारनाथ तक की यात्रा मार्ग का जायजा लिया। आपदा के बाद तैयार किया गया यह पैदल मार्ग पुराने यात्रा मार्ग से आठ किलोमीटर ज्यादा है। जिला अधिकारी को मिली अधिशासी अभियंता की रिपोर्ट के मुताबिक नए मार्ग पर घोड़े-खच्चर आसानी से आ-जा सकते हैं।
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चिंता भी दूर हुई
इस रिपोर्ट से हरीश रावत जैसे वीआईपी की केदारनाथ तक सुरक्षित यात्रा की चिंता भी दूर हुई। केदारनाथ मार्ग में जिला प्रशासन ने सोनप्रयाग के बाद गौरीकुंड, झींगुर पानी, गरुड़ चट्टी और भीमबली में रुकने-ठहरने के लिए पड़ाव तैयार किया है। हर जगह टेंट लगाए गए हैं।

स्थानीय लोगों को भी अपना रोजी-रोजगार शुरू करने को दुकान लगाने, चाय और ढाबे खोलने को प्रशासन ने आवेदन मांगे हैं। जिला प्रशासन यात्रियों के लिए लंगर की भी व्यवस्था बना रहा है। ताकि भोजन की समस्या न हो।

खच्चरों के रेट तय हुए
जिला प्रशासन ने केदारनाथ की पैदल यात्रा करने वालों के लिए खच्चरों के रेट तय कर दिए हैं। पूर्व में गौरीकुंड से केदारनाथ जाने का जहां 1200 रुपए प्रति यात्री था, अब बढ़ा कर 1800 रुपए कर दिया है। वहीं केदारनाथ से नीचे आने के लिए पूर्व में जहां 1000 रुपए था, अब बढ़ा कर 1200 रुपए कर दिया गया है। रेट बढ़ाने का कारण यात्रा मार्ग की लंबाई आठ किलोमीटर बढ़ जाना बताया जा रहा है।

एमआई-17 वापस
जिला प्रशासन ने गुप्तकाशी में तैनात एयरफोर्स का एमआई-17 वापस कर दिया है। इसकी पुष्टि रुद्रप्रयाग के जिला अधिकारी दिलीप जावलकर ने की है। उन्होंने बताया कि केदारनाथ तक घोड़े-खच्चरों के आने-जाने का रास्ता दुरुस्त हो जाने से यह फैसला लिया गया है। अब निर्माण सामग्री और अधिकारियों-कर्मचारियों एवं मजदूरों को केदारनाथ पहुंचने में खच्चरों की मदद ली जाएगी।
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