मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक ब्यूरोक्रेसी को इस अंदाज में धमकाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जैसे अब आगे सब चुस्त-दुरुस्त हो जाएगा। लेकिन एक बात, जो समझने वाली है कि ब्यूरोक्रेसी में यह सारी खामियां चुनाव के बाद और भाजपा को दो-तिहाई बहुमत से सत्ता मिलने के बाद ही क्यों उजागर हो रही हैं।
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हरीश ने कहा कि क्या इससे पहले किसी और पार्टी की सरकार थी? क्या पहले के पांच वर्षों में जो तीन मुख्यमंत्री व मंत्री थे, कहीं और से आयातित थे? मंत्रियों के अंदाज और समाचारों की शब्दावली से ऐसा आभास होता है कि पहले सब गड़बड़ था, अब सब ठीक किया जा रहा है।