उत्तराखंड के बहुचर्चित स्टिंग मामले को लेकर शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खुद ही मोर्चा संभाला। बीजापुर गेस्ट हाउस में मीडिया से मुखातिब, रावत ने सीबीआई जांच के घेरे में आई स्टिंग की सीडी के बहाने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, उनके पुत्र साकेत और भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधा। साथ ही सीडी में पत्रकार की टिप्पणियों को उकेरते हुए रावत ने कई सवाल उठाए।
रावत ने कहा कि राज्य आरोप-प्रत्यारोप में फंसे, इससे बेहतर है कि सीबीआई को अब तक के सारे आरोपों की जांच सौंप दी जाए। 2002 से पहले चौखुरी, बेरीनाग में वन भूमि कब्जाने में भाजपा के कई शीर्ष नेता फंसे थे।
जांच की टाइमिंग पर उठाए सवाल
2012 में ओनीडा फैक्ट्री में लगी आग के मामले में जांच अधिकारी ही बदल दिया गया। रावत ने कहा कि जांच 2007 से लेकर अब तक के सारे प्रकरणों की होनी चाहिए। उन्होंने ने सीबीआई जांच पर सीधे सवाल तो नहीं उठाए, लेकिन कहा कि इस जांच की टाइमिंग से मंशा पर सवाल उठता है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में केंद्र धनबल के साथ अब सीबीआई बल का भी सहारा ले रही है।
स्टिंग करने वाले पर भी निशाना
उन्होंने कहा कि जांच इस मामले की भी होनी चाहिए कि स्टिंग को सामने लेकर आने वाले पत्रकार के खिलाफ पूर्व में दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस क्यों ले लिए थे। रावत ने बाकायदा स्टिंग में शामिल रहे उमेश शर्मा के कहे हुए शब्दों को उकेरा और कहा कि जांच का विषय यह भी होना चाहिए कि यह व्यक्ति विजय बहुगुणा के कार्यकाल में जिस साकेत नाम के व्यक्ति की सेटर होने की बात कर रहा है, क्या यह व्यक्ति विजय बहुगुणा के कार्यकाल में मुख्यमंत्री आवास से ऑपरेट करता रहा।