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स्टिंग प्रकरण: रावत को सीबीआई से बचाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

Tue, 31 May 2016 09:58 AM IST
संजय त्रिपाठी/अमर उजालात, देहरादून
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सीबीआई मुख्यालय के बाहर हरीश रावत - फोटो : फाइल फोटो
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स्टिंग प्रकरण में फंसे मुख्यमंत्री हरीश रावत को सीबीआई के शिकंजे से बचने के लिए राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। इस कवायद का अंदेशा सोमवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में मची हलचल से मिला। सियासी संकट के बाद शुरू हुई सीबीआई जांच से जुड़े तमाम दस्तावेज जुटाए गए।
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इसके साथ ही एसआईटी जांच के आदेश और अब तक जांच में हुई प्रगति को भी संलग्न करके पूरा पोटला बनाया गया है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में सुप्रीम कोर्ट में जांच को असंवैधानिक बताते हुए अर्जी लगाई जाएगी।

सोमवार को सचिवालय में शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के कार्यालय में सुबह से स्टिंग मामले में सीबीआई जांच के मुद्दे की चर्चा रही। इससे संबंधित सभी दस्तावेज भी तलब किए गए। इसमें हरक सिंह रावत की ओर से राज्यपाल से की गई शिकायत की चिट्ठी, राज्यपाल की ओर से सीबीआई जांच की संस्तुति संबंधी आदेश, सरकार के दोबारा सत्ता में लौटने पर कैबिनेट की ओर से सीबीआई जांच वापस लेने संबंधी पत्र, एसआईटी गठन के आदेश, मुख्य सचिव की ओर से भारत सरकार को जांच रोकने संबंधी पत्र आदि दस्तावेज प्रमुख रहे।
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सीबीआई कर सकती है प्रमुख लोगों को गिरफ्तार

हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
सूत्रों की मानें तो इन सभी कागजातों के साथ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी। यह पूरी कवायद सात जून को होने वाली सीबीआई में पेशी को लेकर है। खबर है कि इस तारीख पर सीबीआई एफआईआर दर्ज करेगी। इसके बाद जांच की जद में आए कुछ प्रमुख लोग गिरफ्तार भी किए जा सकते हैं।

अंदरखाने तो इस बात पर भी चर्चा होने लगी है कि सत्ता की बागडोर किस नए चेहरे को सौंपी जा सकती है। बहरहाल सरकारी तंत्र इस समय सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच को असंवैधानिक बताते हुए इस पर रोक लगाने संबंधी याचिका दायर करने की तैयारी में लगा है।

शासन के एक अधिकारी की मानें तो इससे पूर्णकालिक नहीं तो फौरी राहत ही मिल जाए, तो भी इस कवायद का मकसद हल हो जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व में सरकार ने सीबीआई जांच पर रोक लगाने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट की शरण ली थी, मगर वहां से उन्हें मुंह की खानी पड़ी। उलटे हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को सीबीआई जांच में हरसंभव सहयोग करने के निर्देश दिए थे।
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